विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना 2025 के सावन तक…पढ़िए किस दिन से शुरू हो रहा है विराट रामायण मंदिर का निर्माण

*तीन मंजिला होगा विश्व का सबसे बड़ा मन्दिर, गणपति के प्रथम दर्शन*
*3.76 लाख वर्गफुट में कुल 22 मन्दिर, 270 फीट ऊंचा होगा मुख्य शिखर*
पूर्वीे चंपारण जिले के केसरिया-चकिया पथ पर कैथवलिया-बहुआरा में विराट रामायण मन्दिर का निर्माण 20 जून से प्रारंभ हो जाएगा। वर्ष 2025 के सावन तक मन्दिर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना हो जाएगी। उसी साल आखिर तक विराट रामायण मन्दिर बनकर तैयार हो जाएगा। मन्दिर के कुल 12 शिखरों की साज-सज्जा में और दो वर्ष लगेंगे। महावीर मन्दिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने मंगलवार को महावीर मन्दिर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह महत्वपूर्ण घोषणा की। आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि विराट रामायण मन्दिर तीन मंजिला होगा। मन्दिर में प्रवेश के बाद प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान गणेश के दर्शन होंगे। वहां से बढ़ते ही काले ग्रेनाइट की चट्टान से बने विशाल शिवलिंग के दर्शन होंगे। महाबलिपुरम में 250 टन वजन के ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर की चट्टान को तराशकर मुख्य शिवलिंग के साथ सहस्रलिंगम भी बनाया जा रहा है। आठवीं शताब्दी के बाद सहस्रलिंगम का निर्माण भारत में नहीं हुआ है। शिवलिंग का वजन 210 टन, ऊंचाई 33 फीट और गोलाई 33 फीट होगी। आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि इतने वजन के शिवलिंग को लाने के लिए चकिया से कैथवलिया की 10 किलोमीटर की दूरी तक सड़क और पुल-पुलिया के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का अनुरोध बिहार के मुख्यमंत्री और पथ निर्माण मंत्री से किया गया है।


*आकार और ऊंचाई में भव्यतम होगा विराट रामायण मन्दिर*
आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि  मन्दिर का क्षेत्रफल 3.67 लाख वर्गफुट होगा। सबसे ऊंचा शिखर 270 फीट का होगा। 198 फीट का एक शिखर होगा। जबकि 180 फीट के चार शिखर रहेंगे। 135 फीट का एक शिखर और 108 फीट ऊंचाई के 5 शिखर होंगे। विराट रामायण मन्दिर की लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट है। आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि अयोध्या में बन रहे रामलला मन्दिर की लंबाई 360 फीट और चौड़ाई 235 फीट है। जबकि सबसे ऊंचा शिखर 135 फीट का है। विराट रामायण मन्दिर में शैव और वैष्णव देवी-देवताओं के कुल 22 मन्दिर होंगे। मन्दिर निर्माण के लिए 120 एकड़ जमीन उपलब्ध है। इसे जानकी नगर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ कई आश्रम, गुरुकुल, धर्मशाला आदि होंगे। महावीर मन्दिर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मन्दिर का पाइलिंग कार्य कराने वाली एजेंसी सनटेक इन्फ्रा के श्रवण कुमार झा, भास्कर मजूमदार और नीरज चौधरी भी मौजूद थे। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि विराट रामायण मन्दिर में कुल 3102 पिलर होंगे। पाइलिंग कार्य में 1050 टन स्टील और 15 हजार क्यूबिक मीटर कंक्रीट की खपत होगी। निर्माण में लगनेवाली सामग्रियां महावीर मन्दिर उपलब्ध कराएगा। आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि बगैर अग्रिम भुगतान के एजेंसी कार्य करेगी। कार्य के आधार पर भुगतान किया जाएगा। प्रेस कान्फ्रेंस में मौजूद विराट रामायण मन्दिर निर्माण समिति के सचिव ललन सिंह ने बताया कि दस वर्षों के निरन्तर प्रयास से जमीन का प्रबंध किया गया।  विराट रामायण मन्दिर अयोध्या से जनकपुर तक बन रहे राम जानकी मार्ग पर अवस्थित है। 


*कंबोडिया सरकार की आपत्ति से पांच साल रूकावट, केन्द्रीय मंत्री ने की थी प्रशंसा*
विराट रामायण मन्दिर का नाम पहले विराट अंकोरवाट मन्दिर रखा गया था। कंबोडिया के अंकोरवाट मन्दिर से मिलते नाम के कारण कंबोडिया सरकार ने वर्ष 2012 में अपनी आपत्ति दर्ज की। उसी वर्ष मन्दिर का भूमि पूजन हुआ था। महावीर मन्दिर न्यास ने कंबोडिया की आपत्ति के बाद मन्दिर का नाम विराट रामायण मन्दिर कर दिया। 5 साल तक विभिन्न पत्राचार और कवायद के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की उस रिपोर्ट के बाद मामला सुलझा जिसमें विराट रामायण मन्दिर को अंकोरवाट मन्दिर से अलग बताया गया। विराट रामायण मन्दिर के निर्माण के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी अपनी अनापत्ति दी है। तत्कालीन केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री डाॅ महेश शर्मा ने दिनांक 15 फरवरी 2017 को आचार्य किशोर कुणाल को प्रेषित पत्र में विराट रामायण मन्दिर की प्रशंसा में लिखा था- I would like to convey my deep appreciation for the efforts made by your Organization in construction of a temple which appears to be an amalgamation of various architectural forms and designs evolved over a period of time in India and in nearby South-East Asian region. The compassion and maturity shown by your Organization in addressing the concerns of the Combodian Government is also commendable. ‘ मैं आपके संस्थान द्वारा एक ऐसे मन्दिर के निर्माण के लिए किए गए प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूँ जो भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में विभिन्न कालखंडों में विकसित हुए वास्तु-शिल्पों का सम्मिश्रण प्रतीत होता है। कंबोडिया सरकार की आपत्तियों के निराकरण में आपके संस्थान की उदारता और परिपक्वता प्रशंसनीय है।’

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Author: undekhilive

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