पटना। संजय गांधी जैविक उद्यान यानी पटना जू 22 जून को 50 वर्ष का हो गया है। 22 जून 1973 को सेंट्रल जू अथॉरिटी ने इसे चिड़ियाघर की मान्यता दी थी यानी घोषित रूप से इस दिन यह जू की श्रेणी में आ गया था। अक्टूबर 1980 में पटना जू का नामकरण संजय गांधी जैविक उद्यान किया गया। तब से आज तक संजय गांधी जैविक उद्यान ने अनेक बदलाव देखे हैं। पटना जू के 50 वर्ष पूरा होने पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बिहार सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री ने 50 पौंड का केक काटकर इस अवसर को यादगार बनाया।

राजभवन कैंपस में पड़ी थी नींव
पटना जू की नींव राजभवन कैंपस में पड़ी थी। वहां पर पहली बार तीन हिरण लाए गए थे। उन्हें राजभवन कैंपस में एक केज में रखा गया। यह केज आज भी जू में मौजूद है। वहीं से जानवरों को रखने व चिड़ियाघर शुरू करने का विचार आया था और यहां धीरे-धीरे जानवरों की संख्या बढ़ाई जाने लगी। पटना जू में पहली बार वर्ष 1979 में असम से एक जोड़ा गैंडा लाया गया था।

110 प्रजातियों के 1200 से अधिक जानवर
जू में 110 प्रजातियों के करीब 12 सौ जानवरों हैं। इनके लिए करीब 50 बाड़े बनाए गए हैं। जानवरों के साथ 300 से अधिक प्रजातियों के पेड़-पौधे, जड़ी-बूटियां हैं। मछली घर में 35 प्रकार की मछलियों को रखा गया है। बच्चों के लिए चिल्ड्रेन पार्क, जल उद्यान, थ्रीडी थियेटर भी है। जू में बाघ, शेर, तेंदुआ, दरियाई घोड़ा, मगरमच्छ, हाथी, काला भालू, चित्तीदार हिरण, मोर, पहाड़ी मैना, घड़ियाल, अजगर, भारतीय गैंडा, चिंपैंजी, जिराफ, जेबरा, एमू, शुतुामुर्ग, सफेद मोर व अन्य कई जानवर हैं।





