बीडी कॉलेज के परिसर में हुई शास्त्रीय संगीत की इंटर कॉलेज म्यूजिक प्रतियोगिता

शास्त्रीय संगीत भारत देश की संगीत पद्धतियों में सबसे पुरातन संगीत पद्धति है। संगीत जगत में अलग अलग संगीत पद्धतियों का आगमन हुआ और निकास भी मगर शास्त्रीय और सुगम संगीत आज भी एक मजबूत स्तंभ की भांति भारत के कला और संस्कृति को दर्शाते हुए विश्व में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर खड़ा है।यूथ को शास्त्रीय संगीत की ओर अग्रसर करने के लिए देश भर में काफी जगहों पर शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम करवाए जाते हैं ऐसा ही एक शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम का आयोजन पटना के बीडी कॉलेज में किया गया इंटर कॉलेज म्यूजिक प्रतियोगिता के माध्यम से जहां पटना के जाने माने विख्यात कॉलेजों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत द्वीप प्रज्वलन से हुई, तथा निर्णायक गण श्रीमती नीतू कुमारी नूतन तथा डॉ पल्लवी बिस्वास को पुष्प गुच्छ से सम्मानित किया गया। नीतू कुमारी नूतन ने बच्चो में उत्साह बढ़ाते हुए कहा की “आज की ये प्रतियोगिता एक पारिवारिक प्रतियोगिता है, जिसमे फलाफल से सीखना अनिवार्य है, जो भी आज का विजेता हो उसे बधाई तो अवश्य मिलेगी मगर जो किसी कारणवश न जीत पाएंगे उनको सीखने का और शास्त्रीय संगीत समझने के लिए उत्साह मिलेगा”। डॉ पल्लवी बिस्वास ने बताया “रियाज़ है सबसे आवश्यक आपकी जीत या हार आपको एक कलाकार होने की पहचान नही देती, आपका रियाज़ सही तरीके से होना चाहिए।

कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत में कई बच्चो ने भावविभोर प्रस्तुति दी जिन्हे सुनकर तालियों की गूंज रुक नही रही थी। अभिषेक कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया वही द्वितीय स्थान पर प्रसून पाठक रहे। कार्यक्रम में पटना के जाने माने कलाकार भी मौजूद रहे। श्री विवेकानंद जी जो की तबला के मशहूर संगतकार है उन्होंने बताया “इस तरह का कार्यक्रम हर माह होनी चाहिए जिससे यूथ में हमारी प्राचीन संगीत सभ्यता को प्राथमिकता मिल सके”। कार्यकम में नवोदित युवा शास्त्रीय गायक शायक देव मुखर्जी भी मौजूद रहे उनका कहना था “शास्त्रीय संगीत एक विशाल अनंत समुद्र है इसको गाने से पहले समझने की और सही तरीके से रियाज़ करने की आवश्यकता है, ये एक बारीक विद्या है, इसको प्राप्त करने के लिए रियाज़ में कड़ी मेहनत और अनुशासन की जरूरत है”।

हालांकि, बीडी कॉलेज के साउंड सिस्टम से निर्णायक गण तथा श्रोता काफी नाराज़ नजर आ रहे थे और कलाकारों को प्रस्तुति देने में समस्या हो रही थी। ध्वनि विस्तारक यंत्र ऐसे बड़े कार्यक्रम के लिए था ही नही, साउंड क्वालिटी और सिस्टम को लेकर लापरवाही बीडी कॉलेज के परिसर में साफ नजर आ रही थी। सूत्रों के माध्यम से पता चला की बीडी कॉलेज में को संगीत शिक्षक नही है जिसके कारण बच्चों को सही मार्गदर्शन नही मिल पा रहा है, बच्चे इस बात को अपनी हार का एक अहम कारण समझते हैं। सूत्रों से ये भी पता चला की कॉलेज बाहर से नियुक्त किए गए संगत कलाकारों को पेमेंट नही करना चाहते जिसके चलते शिक्षकों को अपनी जेब से भरपाई करनी पड़ती है।

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Author: undekhilive

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