अकेली संत, जिन्होंने कहा होली में पर्यावरण नष्ट न करें, क्रोध-इर्ष्या जलाएं

वीरायतन की संस्थापक और जैन धर्म की पहली महिला आचार्य पद्मश्री आचार्यश्री चंदना जी(ताई मां) देश की शायद अकेली संत हैं, जिन्होंने कहा कि होली के अवसर पर आग से पर्यावरण को नष्ट न करें, बल्कि क्रोध, ईर्ष्या, कामनाओं को जलाएं। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे जीवन में ऐसे शुभ रंगों का प्रवेश हो कि दूसरों की आंखें तृप्त हो सकें।

आचार्यश्री ने जो कहा, वह सत्य है, पर इस सत्य को बोलने के लिए साहस चाहिए। पिछली दीपावली में कई लोगों ने पटाखे न छोड़ने का आग्रह किया और दीपोत्सव मनाने पर जोर दिया। उन्हें सोशल मीडिया में क्या सुनना पड़ा, आप सब जानते हैं। भगवान महावीर के नाम में भी वीर है। उन्होंने भी बलि-प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई थी, तब उनके साथ रूढ़ीवादियों ने क्या व्यवहार किया, उसे समझा जा सकता है।

आचार्यश्री ने होली पर अपने संदेश में तीन बातों पर जोर दिया है। पहला है, पर्यावरण की हिफाजत करें। पृथ्वी रहेगी, तभी कोई देश रहेगा। उनका दूसरा जोर क्रोध-ईर्ष्या जलाने पर है। इस क्रोध को जलाना जरूरी है, वरना यह क्रोध दूसरों को जलाते-जलाते कब खुद को ही जलाने लगता है, आदमी को पता ही नहीं चलता। क्रोध आजकल टैक्स-फ्री है और प्रेम-सद्भाव बेचारा बन गया है। लेकिन आदमी की भलाई क्रोध में नहीं, सद्भाव में ही है। आचार्यश्री आशावादी है। वे अपने होली संदेश में शुभ रंगों के विस्तार का आशीर्वाद दे रही हैं। ऐसे शुभ रंग जो दूसरों की आंखों को तृप्त करें। यहां भी मकसद दूसरों की भलाई ही है।


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Author: undekhilive

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