विभिन्न जातियों के बीच ऊंच-नीच की भावना के कारण कई बार टकराव की घटनाएं होती रहती हैं। भगवान महावीर ने ऊंच-नीच की भावना को अस्वीकार किया था। उनके संदेश को वीरायतन, पालीताणा के स्कूल में बहुत ही रचनात्मक ढंग से व्यवहार में लागू किया जा रहा है। यहां 350 बच्चे पढ़ते हैं।
वीरायतन के अन्य स्कूलों की तरह वीरायतन, पालीताणा स्कूल में भी सिर्फ जैन परिवारों के बच्चे ही नहीं, बल्कि स्वीपर से लेकर पंडित तक के बच्चे साथ-साथ पढ़ते हैं। यही नहीं, महीने में एक बार दलित से लेकर ब्राह्मण तक के बच्चे साथ मिलकर खाना बनाते हैं और एक दूसरे को परोसते हैं। यह बचपन में मिला संस्कार उन्हें जीवन भर आपस में प्रेम-मैत्री की भावना से जोड़े रखेगा।
यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद पद्मश्री आचार्यश्री चंदना जी ने कहा था कि युद्ध-हिंसा मुक्त समाज-विश्व के लिए बचपन से ही हिंसा के विध्वसंक परिणाम से बच्चों को अवगत कराना होगा। बच्चों को हर तरह के भेदभाव की भावना से मुक्त करना होगा। पालीताणा स्कूल का यह नवीन प्रयोग बच्चों के मानस पर अमिट छाप छोड़ेगा।
हाल में पद्मश्री आचार्यश्री चंदना जी (ताई मां) के एक भक्त अफ्रीका से पालीताणा पहुंचे। उन्होंने यहां सभी बच्चों को स्नैक्स और आइसक्रीम बांटे। ये है वीडियो-
यह veerayatan पालीताणा का स्कूल है। 350 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें जैन बच्चों के अलावा स्वीपर से लेकर ब्राह्मण तक के बच्चे पढ़ते हैं। यहां महीने में एक बार दलित- ब्राह्मण सहित सभी जाति के बच्चे मिलकर खाना बनाते हैं और सभी एक दूसरे को परोसते हैं।#Bihar #jain pic.twitter.com/wFKH9GMJpk
— Kumar Anil (@SaatRangIndia) March 9, 2022





