सफेदपोश नेता, आईएएस और माफिया की तिकड़ी ने खूब जमाया रंग

रणजीत डॉन आज भी प्रेरणास्रोत बने हुए हैं

श्यामनंदन कुमार

67वीं बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के पेपर लीक मामले में नित्य नए खुलासे हो रहे हैं. गया स्थित कलंक के केंद्र (परीक्षा केंद्र) रामशरण सिंह इवनिंग कॉलेज और मुख्य साजिशकर्ता यानी प्रिंसिपल सह केन्द्राधीक्षक सह जद यू नेता शक्ति कुमार ( जिसे जुर्म की दुनिया में थ्री स्टार इंस्पेक्टर कहा जाता है) सुर्खियाँ बटोर रहे हैं. इन्होने गया के तीन सफेदपोश नेताओं का भी नाम लिया है जो इन्हें समर्थन, संरक्षण और प्रोत्साहन देते थे. बिहार में कैडर बदलकर बुलाये गये आईएएस ऑफिसर और वर्तमान में पंचायती राज निदेशक डॉ. रणजीत कुमार सिंह भी इस मामले में काफी सुर्खियाँ बटोर चुके हैं क्योंकि उन्होंने ही 8 मई को 11.15 बजे प्रश्नपत्र बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक सह संयुक्त सचिव अमरेन्द्र कुमार सिंह को भेजा था. इसे उन्होंने कैमरा के सामने स्वीकार किया था. इस तरह सफेदपोश नेता, आईएएस और माफिया की तिकड़ी ने ऐसा रंग जमाया कि किसी समय टीवी पर आनेवाला शराब से जुड़ा एक विज्ञापन याद आ गया. “खूब जमेगा रंग जब मिल बैठेगे हम, तुम और ये (शराब का ब्रांड)”  

हालाँकि, ये कोई नयी बात नहीं है. आज से 20 साल पहले 2001-2002 में मेडिकल परीक्षा में धांधली को लेकर बिहार के एक MBBS पासडॉक्टर रणजीत कुमार” जिन्हें शिक्षा मफिया प्यार से रणजीत डॉन” के नाम से पुकारते थे, सुर्खियाँ बटोर रहे थे. कई प्रभावशाली, रसूखदार अफसरों, नेताओं और पूंजीपतियों के बीच रणजीत डॉन एक चर्चित नाम था, आशा का केंद्र था जिनके बच्चों को मेडिकल में एडमिशन दिला कर, उन्हें काबिल डॉक्टर बनाकर उनका बेड़ा पार किया था. डॉक्टर रणजीत कुमार ने मेडिकल, इंजीनियरिंग से भी आगे संघ लोक सेवा आयोग में भी सेंध लगा कर IAS, IPS अफसर बनाने का भी खूब ढोल पीटा था. अख़बारों में सुर्ख़ियों की कमी नहीं थी. आज भी रूप बदलकर शिक्षा माफिया “रणजीत डॉन” से प्रेरणा लेकर वही खेल जारी रखे हुए हैं. किसी का भविष्य चौपट होता हो तो उनकी बला से.     

गया के रामशरण सिंह इवनिंग कॉलेज के 37 साल के प्रिंसिपल शक्ति कुमार ने अपने प्रेरणास्रोत, दीप स्तम्भ   “रणजीत डॉन” को भी पीछे छोड़ते हुए डॉक्टर, इंजीनियर से आगे बढ़कर डी.एस.पी, एस.डी.ओ, सी.ओ, समेत अन्य महत्वपूर्ण अफसरों की बहाली प्रक्रिया में ही सेंध लगा दी है. अब तो संदेह यह भी है कि बीपीएससी की 65 वीं और 66 वीं की परीक्षाएं भी बहुत खास अंदाज़ में यहाँ मैनेज की गयी होगी. इसका खुलसा तो गिरफ्तार राजस्व पदाधिकारी कर सकता है जो बीपीएससी की परीक्षा पास कर पिछले साल सेवा में आया है. खास बात यह भी है कि इस कॉलेज की मान्यता भी मगध यूनिवर्सिटी से समाप्त हो चुकी थी. फिर किन परिस्थितियों में और किनकी अनुशंसा से इस गैर मान्यता प्राप्त निजी कॉलेज में बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा का केंद्र बनाया गया था. खबर तो यह भी है कि आरा के जिस वीर कुंवर सिंह कॉलेज में पेपर लीक का हंगामा हुआ, वह भी एक निजी कॉलेज है जहाँ के Static Magistrate एवं बड़हरा के बीडीओ जयवर्धन गुप्ता, प्रिंसिपल डॉ. योगेन्द्र प्रसाद सिंह समेत 16 लोग जेल में हैं. जाँच एजेंसी E.O.U के मुखिया इस पूरे मामले की बिखरी कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.  

बिहार पुलिस मुख्यालय “पटेल भवन”

पेपर लीक कांड गत 8 मई को हुआ. खूब किरकिरी हुई बिहार लोक सेवा आयोग की. यह एक संवैधानिक संस्था होती है. प्रशासनिक ढांचा को सुयोग्य राजपत्रित अधिकारी उपलब्ध करना इसका मूल उद्देश्य है. वैसे यह संस्था कोई दूध की धूली नहीं है. यहाँ के एक पूर्व अध्यक्ष के साथ तो अजीबोगरीब वाकया हुआ था. अपने कार्यकाल के अंतिम दिन वे विदाई समारोह में सम्मानित होकर आवास पर आ गए थे. दूसरे दिन यहाँ के सभी अख़बारों में खबर छपी कि अध्यक्ष (…….) बेहद गंभीर आरोपों में पद से बर्खास्त कर दिए गए हैं. उनकी बर्खास्तगी पर रात 11.30 बजे मुहर लगी क्योंकि तकनीकी रूप से वे 11.59 बजे तक अध्यक्ष थे. कानूनी दांव-पेंच में मामला उलझा मगर संस्था पर तो कालिख लग ही गयी थी.   

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Author: undekhilive

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