महावीर आरोग्य संस्थान में डॉ. खुशबू और डॉ. संजीव की टीम ने किया ऑपरेशन
सम्यक न्यूज़, पटना.
राजस्थान के जोधपुर में रह रही 35 साल की रेखा के पेट से नौ किलो का बिनाइन (benign) ट्यूमर निकाला गया है। महावीर मन्दिर न्यास द्वारा संचालित महावीर आरोग्य संस्थान में डॉ. खुशबू और डॉ. संजीव की टीम ने चार घंटे तक चली जटिल सर्जरी के जरिए सिस्ट को निकाला। महावीर आरोग्य संस्थान की स्त्री एवं प्रसव रोग विशेषज्ञ डॉ खुशबू कुमारी ने बताया कि महिला का पेट 9 माह के गर्भ की तरह बड़ा हो गया था। उसकी आंत और पेशाब की थैली सिस्ट से संलग्न हो गयी थी। सिस्ट से दोनों को अलग करने के बाद उसे निकाला गया। डॉ. खुशबू कुमारी ने बताया कि उनके ओपीडी में यह महिला पेट में लगातार दर्द की शिकायत लेकर आयी थी। उसका पेट भी बहुत फूला हुआ था। सी.टी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जांच में अंडाशय के ट्यूमर का पता चला। उसकी बच्चेदानी पहले से निकली हुई थी। बहरहाल पूरी जाँच के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया गया. अब वह महिला ठीक है। शुक्रवार से उसे सेमी सालिड डाइट दिया जाने लगा। डॉ. खुशबू ने बताया कि दरअसल, ट्यूमर असामान्य कोशिकाओं के समूह होते हैं. यह गांठ के रूप में विकसित होते हैं. ट्यूमर कैंसरयुक्त हो भी सकता है और नहीं भी. सारे ट्यूमर खतरनाक नहीं होते हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्यूमर दो तरह के होते हैं. पहला मलिगनेंट ट्यूमर (कैंसरयुक्त ट्यूमर) और दूसरा बिनाइन ट्यूमर. यह कोशिकाओं का एक समूह है, जो अपनी उत्पत्ति की जगह से आगे नहीं फैलता है. इस ट्यूमर का असर शरीर के दूसरे अंगों पर नहीं पड़ता है. मगर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह खतरनाक भी हो सकता है. उन्होंने बताया कि बिनाइन ट्यूमर होने के कई कारण हैं. इनमें संक्रमण, सूजन, तनाव, रेडिएशन आदि के संपर्क में आना, शरीर के किसी अंग में चोट लगना समेत आनुवंशिक कारण भी हैं. सिर दर्द, बेचैनी, वजन कम होना, ठंड लगना, भूख न लगना, बुखार, रात में सोते समय पसीना आना आदि बिनाइन ट्यूमर के लक्षण हैं. शरीर में यह मस्तिष्क, गर्दन, नाक, पेट, फेफड़े, ब्रेस्ट समेत शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है. अगर आप शरीर के किसी हिस्से में असहज महसूस करते हैं, तो सबसे पहले डॉक्टर से जरूर जांच करवा लें.
डॉ. खुशबू ने कहा कि तीन-चार दिनों में मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। महावीर मन्दिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने सफल ऑपरेशन के लिए डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है।
किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है F.I.R





