दान पात्रों में भेंट की राशि डेढ़ गुना हुई
सम्यक न्यूज़, पटना.
कोरोना काल के बाद महावीर मन्दिर खुलने के बाद भक्तों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। यहाँ भक्तों की भीड़ की एक कसौटी नैवेद्यम् की बिक्री भी है। मन्दिर के इतिहास में पहली बार नैवेद्यम् की बिक्री एक लाख किलो से भी अधिक प्रति माह हुई। अप्रैल में नैवेद्यम् की कुल बिक्री 1,18,946 (एक लाख अठारह हजार नौ सौ छियालीस) किलो हुई और मई महीने में यह विक्रय 1,16,698 (एक लाख सोलह हजार छः सौ अंठानवे) किलो हुआ। जून में भी 15 दिनों में यह बिक्री 58,822 (अंठावन हजार आठ सौ बाईस) किलो हुई. इस हिसाब से जून महीने में भी एक लाख किलो से अधिक की बिक्री अनुमानित है। महावीर मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार तिरुपति बालाजी मन्दिर के बाद देश के किसी मन्दिर में लड्डू की सबसे अधिक बिक्री महावीर मन्दिर में होती है और वह भी एक केन्द्र से।

मंदिर न्यास द्वारा उपलब्ध जानकारी के अनुसार महावीर मन्दिर में नैवेद्यम की बिक्री की शुरुआत 22 अक्टूबर 1992 से हुई। शुरुआती दौर में बिक्री का आंकड़ा औसतन लगभग 500 किलो प्रति माह था। आज यह एक लाख किलो पार कर गया है. इस उत्पाद को भारत सरकार के खाद्य सुरक्षा प्राधिकार (FSSAI) का भी प्रमाणपत्र मिल गया है जो इसकी गुणवत्ता का द्योतक है. इसी तरह भेंट-पात्रों में डाली गयी राशि में भी वृद्धि हुई है। पहले यह राशि एक लाख रुपये प्रतिदिन के हिसाब से आती थी। किन्तु पिछले ढाई महीनों में यह राशि कुल 1,12,73,713/- (एक करोड़ बारह लाख तिहतर हजार सात सौ तेरह) रुपया प्राप्त हुई है, जो प्रतिदिन के हिसाब से 1,48,338/- (एक लाख अड़तालीस हजार तीन सौ अड़तीस) रुपया बनता है। यह अवधि ऐसी है, जब भक्तों की संख्या सबसे अधिक होती है और लड्डू की बिक्री सर्वाधिक होती है। इसी प्रकार, इस अवधि में सबसे अधिक कर्मकाण्डीय पूजा-पाठ होता है। पिछले ढाई महीनों में कर्मकाण्ड के सभी मदों में कुल 96,67,178/- (छीयानवे लाख सड़सठ हजार एक सौ अठतर) रुपया की राशि प्राप्त हुई है जिसमें केवल रुद्राभिषेक में 20,68,823/- (बीस लाख अड़सठ हजार आठ सौ तेईस) रुपया का शुल्क प्राप्त हुआ है। इसमें उस राशि का भी समावेश है जो पूजा-पाठ में लगने वाली सामग्री भी है जो मन्दिर की ओर से दी जाती है और मन्दिर द्वारा पुरोहितों को दी जाने वाली दक्षिणा राशि भी है। यह देश का शायद एक मात्र मन्दिर है जहाँ रसीद कटाने के बाद भक्त को पूजा-सामग्री या दक्षिणा पर एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। बारिश के महीनों में, पितृपक्ष में, पौष मास में, खरमास में तथा कुछ अन्य अवसरों पर मन्दिर में भक्तों की भीड़, लड्डू की बिक्री एवं पूजा-पाठ सब कम हो जाता है। महावीर मन्दिर भक्तों को भक्ति के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करता है। अतः हनुमानजी की पूजा-अर्चना सालों भर पूरी तन्मयता के साथ करनी चाहिए।
महावीर मन्दिर अपनी आय का 4 प्रतिशत बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड को शुल्क में देता है और इस बार महावीर मन्दिर बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड को करीब एक करोड़ रुपया शुल्क के रूप में देगा। इसके अलावा वह मंदिर की आमदनी और दान-पात्रों की राशि से राजधानी में पांच बड़े अस्पतालों का संचालन भी कर रहा है जहाँ बाज़ार दर से बहुत कम शुल्क पर इलाज़ एवं जाँच की सुविधा मिल रही है.
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