सम्यक न्यूज़, पटना.
बिहार अब लिट्टी-चोखा , सिलाव के खाजा, चूड़ा-घुघनी, मिथिला मखान और रोहू, कतला, हिलसा मछलियों के दौर से आगे निकल चुका है. पहले से इसकी पहचान सुगन्धित बासमती चावल, दरभंगा -मधुबनी का मखाना, मुजफ्फरपुर की शाही लीची, भागलपुर का कतरनी चावल, जरदालू आम, गया-नवादा का मगही पान आदि से रही है. दीघा के मालदह आम के शौक़ीन तो मुग़ल बादशाह भी रहे हैं. अब इसकी इंद्रधनुषी जैव विविधता की छटा अम्बर पर शोभायमान हो रही है. राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की सजी -संवरी सूरत निखरने लगी है. इसकी बानगी देखने को मिली चेन्नई में, जहाँ गत 22 मई को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया गया. भारत के भी राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की तरफ से वहां आयोजित मेले में देश के सभी राज्यों ने भाग लिया. इसमें बिहार के स्टाल ने सबका मन मोह लिया और ख्यातिप्राप्त जैव विविधता विशेषज्ञ भी बिहार की धरोहर देख अभिभूत हो गये और मुक्त कंठ से प्रशंसा की. दरअसल बिहार के रोहतास जिले का जैव विविधता का “मानी मॉडल” सबके आकर्षण का केंद्र बना रहा. बिहार के बाद गुजरात के जैव विविधता मॉडल को भी लोगों ने खूब सराहा.
बिहार के रोहतास जिले का एक गाँव है “मानी “. यह विक्रमगंज अनुमंडल में पड़ता है. “मानी “ के जैव विविधता प्रबंधन समिति, के अध्यक्ष मृत्युंजय मानी ने बताया कि बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद की तरफ से जैव विविधता प्रबंधन समिति, मानी, रोहतास ने चेन्नई में स्टाल लगाया। इसमें बिहार के सभी क्षेत्र की विविधताएं प्रदर्शित की गई। बिहार के स्टाल का निरीक्षण केंद्रीय पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री अश्वनी कुमार चौबे, तमिलनाडू के पर्यावरण मंत्री, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अध्यक्ष डाॅ. विनोद बिहारी माथुर, सदस्य सचिव जे. जस्टिन मोहन ने किया। दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने बिहार के स्टाल की जमकर सराहना की।
बिहार की तरफ से मधुबनी पेंटिंग, मंजूषा पेंटिंग, सिक्की पेंटिंग, पुआल पेंटिंग, सुजनी कला आदि को प्रदर्शित किया गया। कैमूर पहाड़ी की संजीवनी बूटी, कैमूर पहाड़ी की जंगली प्याज, भागलपुर के जर्दालु आम, मधुबनी-सहरसा के मखाना के बीज, नवादा-गया के मगही पान, कैमूर के मोकरी गांव के गोविंदभोग धान (इसके चावल से अयोध्या में रामलला मंदिर में भाेग लगाकर प्रसाद वितरण होता है ), शाहाबाद के सोनाचूर धान, भागलपुर के कतरनी धान, चंपारण के मर्चा धान, चंपारण के आनंदी धान, देसी मूंग सहित कई बीजों को प्रदर्शित किया गया। परंपरागत तरीके से गांव में बनने वाले अदौरी, तिसौरी, चरौरी को भी प्रदर्शित किया गया। मूंज और सिक्की की डालियां प्रदर्शित की गई। स्टाल निरीक्षण के दौरान प्राधिकार के अधिकारियों ने बिहार हेरिटेज ट्री ऐप की सराहना की तथा देशभर में लागू कराने की बात कही।

राष्ट्रीय स्तर के इस कार्यक्रम में बेहतर कार्य करने वाले राज्यों के प्रतिनधियों को बोलने का मौका दिया गया। बिहार की तरफ से जैव विविधता प्रबंधन समिति, मानी रोहतास के अध्यक्ष मृत्युंजय मानी ने अपनी बातें रखीं। उन्होंने भारत सरकार से “मानी माॅडल” को देशभर में लागू करने की मांग की। उन्होंने बताया कि अभी हमलोग 12 क्लब का गठन कर 150 से अधिक सक्रिय सदस्य बनाकर कार्य कर रहे हैं। बाल क्लब का गठन कर पंचायत के सभी सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों के स्कूली बच्चों के माध्यम से घर-घर तक पहुंच गए हैं।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अध्यक्ष डाॅ. विनोद बिहारी माथुर ने जैव विविधता प्रबंधन समिति के कार्यो की भरपूर सराहना की। प्राधिकार के सदस्य सचिव जे जस्टिन मोहन ने मानी गांव में आकर मॉडल देखने की बात कही। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में बिहार से तीन सदस्यीय टीम का नेतृत्वा बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद के सचिव डॉ के गणेश कुमार ने किया। इस टीम में बीएसआइपी इंटर्न उपर्णा चैटर्जी भी शामिल थीं.
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