गिरीश कर्नाड” के जन्म दिवस के अवसर पर उनके द्वारा लिखित एवं “डॉ इंदु पाण्डेय द्वारा निर्देशित नाटक “क्रॉसिंग टू तालीकोटा” का कालिदास रंगालय, गाँधी मैदान, पटना में मंचन किया गया. गिरीश कर्नाड ने नाटक “क्रासिंग टू टालिकोटा नाटक के द्वारा ने उस समय के (1565) दक्षिण भारत की राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक स्तिथि पर प्रकाश डाला हैं। उन्होंने बहुत सहजता से ये दर्शाया है की विजय नगर की विशाल सेना दक्षिण के सुल्तानों को अपनी ईच्छानुसार घुमाते हैं। रामाराय, कृष्णदेव राय के दामाद होते हुए राजा नहीं बन पाते क्योंकि उनके अन्दर शाही खून का संचार नहीं था। वहां की जनता ने उन्हें अस्वीकार कर दिया, इस दंश को झेलने के कारण वो अपने योग्य भाइयो वैकताद्री एंड तिरुमाला के होते हुए युद्ध क्षेत्र में पालकी पर बैठकर अपने सैनिकों का हौसला बढ़ाने चले जाते हैं। उनकी इस छोटी सी भूल के कारण टालिकोटा के युद्ध में उन्हें बंदी बना लिया जाता हैं। उनके सर को घर से अलग कर दिया जाता है। विजयनगर में कत्लेआम के साथ लूट-पाट मच जाता है। उसका अस्तित्व ही खत्म हो जाता हैं।

• गिरीश कर्नाड ने अपने इस नाटक में ये संदेश दिया हैं की जातिये भेदभाव के आधार पर योग्यता का तिरस्कार नहीं करना चाहिए। राजनीति में महत्वाकांक्षा को नियंत्रित करना चाहिए। एक तानाशाह को कोई पसंद नहीं करता, उसका अंत सुनिश्चित हैं। बुद्धि और विवेक से ही स्थायि विजय का आनंद प्रदान किया जा सकता हैं।
नाटक में रामाराय की भूमिका रेंजी जॉर्ज जोसेफ ने, तिरुमाला की मधुर सौरव, वेंकतादरी ब्रजेश कुमार, आदिल शाह ने रंजन ठाकुर, बारिद शाह मो. सदुदीन, निज़ाम: अभिषेक कुमार, हकिम/काज़ी: प्रत्युष राज, बेगम/तिरुमालम्बा: अद्विता सिंह, सदाशिव / कुतुब शाह: निर्मला सिंह ने काफी अच्छी तरह निभाई.
राजकुमार शर्मा एवं अनिमेष कुमार सिंह. नाटक का संगीत: सुमित आर्य सिंह ने दिया जबकि वीडियोग्राफी: दुर्गेश्वर विश्वकर्मा ने किया. प्रस्तुति प्रभारी अभिषेक बिहारी.
नाटक को दर्शकों ने काफी पसंद किया.





