पटना, सम्यक न्यूज़ – बुद्ध स्मृति पार्क संग्राहलय के सभागार में फेसेस पटना, बिहार पुराविद परिषद्, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (पटना सर्किल) पटना संग्रहालय पटना एवं बुद्धा स्मृति पार्क संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में फेसेस हेरिटेज फेस्टिवल 2022 के तहत भारतीय संस्कृति और विरासत विषय पर एक राष्ट्रीय सेमीनार का आयोजन किया गया।
अतिथियों का स्वागत फेसेस की सचिव सुनिता भारती, पटना संग्रहालय के संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. शंकर सुमन और बुद्धा स्मृति पार्क संग्रहालय के डॉ. नीतू तिवारी के द्वारा किया गया।

इस सेमिनार में मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रसिद्द इतिहासकार एवं सांस्कृतिक विश्लेषक (प्रोफेसर एवं प्रधान, इतिहास विभाग, कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना) डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि भारत की संस्कृति को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता है। जो यह कहते हैं कि भारतीय संस्कृति मिश्रित संस्कृति है, वे यह नहीं बता पाते कि इस मिश्रण के अवयव क्या हैं? जो भी यहाँ बाहर से आये वे सभी यहाँ की संस्कृति में समाहित हो गए. अतः भारत की संस्कृति सनातन से ही सार्वभौम और परिशुद्ध रूप से सतत है, जिसके धारणकर्ता भले ही विविध नस्लों के लोग हैं मगर सांस्कृतिक अभिधारणा एक और शास्वत है।
डॉ. चितरंजन प्रसाद सिन्हा पूर्व निदेशक काशीप्रसाद जायसवाल शोध संस्थान ने कहा कि वस्तुतः सरकार का कोई ध्यान और इच्छा शक्ति नहीं है कि हमारे विरासतों का प्रचार प्रसार हो और वे सुरक्षित रहें। न ही संग्रहालयों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की भारती हो रही है जिनके ऊपर बहुमूल्य धरोहरोंका दायित्व दिया जा सके। न ही पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण हो पा रहा और न ही यहाँ के अद्वितीय धरोहर जैसे छठ पूजा और राजगीर के सैक्लोपियन वाल, जो की चीन के दीवार से भी प्राचीन है, को विश्व के धरोहर के रूप में शामिल करने का कोई प्रयास हो रहा है।
डॉ. कामेश्वर प्रसाद, पूर्व विभागाध्यक्ष, इतिहास वभाग पटना विश्वविद्यालय ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि आज की पीढ़ी नहीं जानती कि बुलन्दिबाग, छोटी पहाड़ी, पंचा पहाड़ी जैसा कोई पुरातात्विक स्थल भी है पटना में जिसका बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है – भारत के इतिहास के निर्माण में। अतः जो पहला काम होना चाहिए वह यह है कि पुरातात्विक अन्वेषणों और कार्यों को सुरक्षित ही नहीं रखना होगा बल्कि उनके विषय में लोगों को शिक्षित करने का प्रयास भी होना चाहिए। ख़ुशी है कि फेसेस इस काम को बहुत ही प्रभावी और नूतन तरीके से कर रही है।
डॉ. विमल तिवारी, अवर निदेशक, पटना संग्रहालय ने कहा कि मात्र सरकार के स्तर से ही नहीं बल्कि सार्वजनिक तौर पर भी विरासतों के संरक्षण के लिए की जागरूकता की आवश्यक है।
सभा का सञ्चालन बिहार पुराविद परिषद् के महासचिव डॉ. उमेश चंद्र द्विवेदी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन फेसेस की अध्यक्ष डॉ. रूचि शरण के द्वारा किया गया।
इस आयोजन में सम्मानित अतिथि के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. डी. एन. सिन्हा, डॉ. माधुरी अग्रवाल एवं झारखण्ड पुरातत्व विभाग के डॉ. अजित कुमार एवं निरंजन उपाध्याय, श्री संदीप भी उपस्थित थे। इस सेमिनार में लगभग 50 से अधिक शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया और लाभान्वित हुए।





