जैन मुनि का भगवान महावीर की जन्म भूमि वासोकुंड में मंगल प्रवेश

जैन मुनि आचार्य प्रमुख सागर महाराज अपने संघ के साथ हजारों किलोमीटर पदयात्रा कर कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोआ, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश से विहार करते हुए भगवान महावीर की जन्म भूमि वासोकुंड वैशाली पहुंचे।

वासोकुंड, वैशाली में दर्शन करते श्रद्धालु

आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज ससंघ  आठ पिच्छी ,जिसमे एक आचार्य, एक मुनिराज, एक छुल्लक जी  और पाँच  माता जी , साथ मे चालीस से पचास भक्त अपनी अपनी भक्ति की सेवा  देते हुए जिसमे के  महिलाएं भी शामिल है  निरंतर  चलते हुए मुनिराजों को विहार करवा रहे है ।

   मौके पर मुनि श्री का स्वागत एवं पाद प्रक्षालन मुज़फ़्फ़रपुर जैन समाज के रविन्द्र जी जैन, राजेश जी जैन चूड़ी वाले, नवीन जी जैन,  एवं पटना से बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष अखिलेश जी जैन आदि ने किया। इस सभी कार्य का संचालन मंदिर कमेटी श्री मुकेश जी जैन कार्याध्यक्ष- भगवान महावीर स्मारक समिति, श्री राकेश जी जैन कोषाध्यक्ष-भगवान महावीर स्मारक समिति एवं श्री राजेन्द्र जी जैन मंत्री मंदिर व्यवस्था-भगवान महावीर स्मारक समिति के द्वारा हो रहा है। जिसमें मुनि श्री के संघपति श्री अभिषेक जैन जी का बहुत सहयोग रहा है।

आचार्य श्री ने मंदिर में प्रवचन देते हुए कहा कि यह हम सभी का बहुत बड़ा सौभाग्य है कि आज हम चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्म भूमि पर पधारे हैं। मुनि श्री ने कहा कि अक्षय तृतीया  पर्व अच्छे पुण्य देने वाला है। आचार्य श्री ने कहा कि अक्षय तृतीया  के ही दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को राजा श्रेयांश के द्वारा प्रथम आहार दिया गया था। तभी से दान की परंपरा शुरू हुई। मुनि श्री ने कहा कि अक्षय तृतीया  के दिन कोई भी मांगलिक कार्य बिना किसी मुहूर्त के किया जा सकता है।

जैन मुनि ने कहा कि हम भारत में रहने वाले लोग ऋषि मुनियों की परंपराओं और महापुरुषों की जीवनी घटनाओं को पर्व के रूप में मनाते हैं. हमको अपने जीवन में हमेशा बड़ों का सम्मान करना चाहिए. परिवार में आत्मीयता वह प्रेम से रहना चाहिए तथा भारत की संस्कृति का सम्मान करना चाहिए.

  मुनि श्री ने मंदिर में आहारचर्या किया एवं भगवान का दर्शन किया. मुनिश्री ने कहा कि भगवान् की जन्मस्थली पर आकर मन को बहुत हीं शान्ति मिलती है.

  एम पी जैन ने बताया की मुनिश्री अभी संघ के साथ भगवान महावीर जन्मस्थली में कुछ दिन रहकर धार्मिक क्रिया करेंगें.  

undekhilive
Author: undekhilive

Leave a Comment