जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ को एक वर्ष के उपवास के बाद अक्षय तृतीया को इच्छुरस पिलाया गया
आज पटना के सभी जैन मंदिरों में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की पूजा की गई। आज ही के दिन भगवान ऋषभदेव ने एक वर्ष 39 दिन के उपवास के पश्चात् हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस से इच्छुरस (ईख का रस) का आहार ग्रहण किया था। जैन धर्म मे इसीलिए अक्षय तृतीया का महत्व है तथा इसी दिन से दान की प्रथा को प्रारंभ किया गया।

आज प्रातः से ही मीठापुर दिगम्बर जैन मंदिर में सैकड़ों की संख्या में जैन श्रद्धालुओं ने इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की पूजा तथा विधान किया।
पूजा विधान के बाद सभी श्रद्धालुओं को इच्छुरस (गन्ने का रस) पिलाया गया। मौके पर मीठापुर जैन समाज के अध्यक्ष विजय जैन कासलीवाल ने बताया कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को अक्षय तृतीया के दिन ही इच्छुरस पिलाकर उनके एक साल से अधिक का उपवास समाप्त कराया गया था।

मौके पर जैन समाज के एम पी जैन ने बताया कि जैन समाज में अक्षय तृतीया का प्राचीन इतिहास हस्तिनापुर तीर्थ से प्रारंभ हुआ है। अक्षय तृतीया के दिन ही हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस एवं उनकी भाई सोमप्रभ को भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) को इच्छुरस से आहार दान कर उनका एक साल से अधिक का उपवास समाप्त कराया था।
वैशाख सुदी तीज को अक्षय तृतीय के नाम से जाना जाता है। अक्षय का अर्थ है जिस वस्तु का कभी क्षय न हो अर्थात् वस्तु समाप्त न हो. इसलिए इसका नाम अक्षय तृतीया पड़ा। लोगों का मानना है कि इस दिवस किया जाने वाला कार्य वृद्धि को प्राप्त होता है। भगवान ऋषभदेव को हुए करोड़ों करोड़ो साल व्यतीत हो गये। लेकिन आज भी अक्षय तृतीया का पर्व मनाने के लिए देश एवं विदेश से जैन श्रद्धालु हस्तिनापुर की धरती पर आते हैं।
मेरठ के पास स्थित हस्तिनापुर जम्बूद्वीप स्थल पर जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी की पावन प्रेरणा से आहार महल का निर्माण किया गया है, जिसमें भगवान ऋषभदेव व राजा श्रेयांस की प्रतिमा विराजमान की गई है। प्रत्येक वर्ष इस प्रतिमा के समक्ष इच्क्षुरस का आहार करवाया जाता है एवं आने वाले भक्त भगवान को आहार देने का सौभाग्य प्राप्त करते है एवं गन्ने के रस का प्रसाद ग्रहण करते है। अक्षय तृतीया का पावन पर्व हस्तिनापुर से ही प्रारंभ हुआ है. इसकी पहचान ही हस्तिनापुर से है। तब से लेकर के आज तक करोड़ो वर्ष बीत गये लेकिन उसी मान्यता को लेकर भक्तगण आज भी इस धरती पर आ करके अक्षय तृतीया के दिन तीर्थ पर विराजमान साधुओं को आहार देकर के अपने जीवन को धन्य मानते है।
आज मीठापुर जैन मंदिर में चिरंजीलाल जैन, सुनील जैन बड़जात्या, प्रदीप छबड़ा, संदीप जैन छाबड़ा, ममता छाबड़ा, अजय जैन बड़जात्या, कमल जैन छाबड़ा, ममता जैन बड़जात्या, गुणमाला जैन बड़जात्या, साधना जैन, सहित सैकड़ों ने पूजा में भाग लिया
आज मुरादपुर जैन मंदिर में सुबोध जैन सहित अन्य श्रद्धालुओं ने पूजा की। साथ ही कांग्रेस मैदान स्थित जैन मंदिर एवं अन्य मंदिर में भी पूजा की गई।





