ग्रीष्म ऋतु में राह चलते राहगीर अपनी प्यास बुझाने के लिए ठंडे पानी की खोज में रहते हैं। ऐसे वक्त में अगर शुद्ध मीठा पेय मिल जाता है तो इससे पढ़कर खुशी की बात और कुछ भी नहीं हो सकती। वैसे भी हमारे शास्त्रों में प्यासे को पानी पिलाना पुण्य का काम माना गया है। उसका महत्व तब और बढ़ जाता है जब अवसर अक्षय तृतीया का हो। उपरोक्त बातें बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष महेश जालान ने अमृत महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर कहीं। मारवाड़ी सम्मेलन के द्वारा अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर बिहार के 35 जिलों की 104 शाखाओं के माध्यम से 120 स्थानों पर अमृत महोत्सव के अंतर्गत आम आवाम के बीच शिकंजी नींबू और सत्तू , शरबत, जलजीरा, छाछ, लस्सी बेल और तरबूज का जूस इत्यादि जरूरतमंदों को पिलाया गया।

जालान में बताया कि सेवा और परोपकार मारवाड़ी समाज के संस्कार हैं। यदि पर्व त्यौहारों को उत्सवधर्मिता के साथ हीं यदि भलाई के काम से भी जोड़ दिया जाए वो उनका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान से आकर देश-विदेश के विभिन्न भागों में बसा मारवाड़ी समाज स्थानीय लोगों की बेहतरी और विकास के लिए निरन्तर काम करता है।

मारवाडी सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष संगठन नीरज खेड़िया ने कहा कि अमृत महोत्सव की सफलता के लिए जिस प्रकार न केवल सम्मेलन के सदस्य बल्कि बच्चे युवा और महिलाएं भी, सभी एकजुटता के साथ लगे रहे उससे यह संदेश गया है कि सिर्फ अपने लिए जीना हीं जिंदगी नहीं होती मनुष्य को दूसरे के भी काम आना चाहिए।

बिहार प्रादेशिक मारवाडी सम्मेलन के उपाध्यक्ष प्रशासन राजेश बजाज ने अमृत महोत्सव की सफलता के लिए समस्त पदाधिकारियों सदस्यों एवं समाज बंधुओं को हार्दिक बधाई देते हुए विश्वास जताया कि सम्मेलन के आगामी सेवा कार्यों में भी उन सभी का सहयोग इसी प्रकार मिलता रहेगा।
मौके पर एम पी जैन ने कहा कि मारवाड़ी सम्मेलन हर समय समाज की भलाई के लिए कार्य करता रहेगा।





