स्पाइनल कॉर्ड इंजरी (मेरूदंड के चोट)जागरूकता*

स्पाइनल कॉर्ड हमारे रीढ़ के मध्य से गुजरने वाली नसों का तंत्र है जिसके माध्यम से हम अपने शरीर के सभी अंगों को नियंत्रित करते हैं। यदि स्पाइनल कॉर्ड किसी दुर्घटना में चोटिल हो जाता है तब चोट के नीचे वाले शरीर का हिस्सा लकवाग्रस्त हो जाता है। किसी भी दुर्घटना के बाद हादसे के शिकार व्यक्ति को उठाने और प्रथम उपचार देने में सावधानी के साथ सही तरीके का इस्तेमाल जरूरी है। यह बात 28 राज्यों की यात्रा पर निकले मोहम्मद जाविद ने कहा।
 
मोहम्मद जाविद पूरे देश में आम लोगों के बीच स्पाइनल कॉर्ड इंजरी (मेरूदंड के चोट) और सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों के सही प्रथमोपचार के लिए जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से भारत यात्रा कर रहे हैं।
 
मोहम्मद जाविद स्वयं एक पैराप्लेजिक (स्पाइनल कॉर्ड चोटिल) व्यक्ति हैं जिसके कारण उनके कमर के नीचे का शरीर लकवाग्रस्त है। वह एक बैंकर हैं। 8 मार्च को महिला दिवस के अवसर पर चेन्नई से 30 हजार किलोमीटर की यात्रा पर निकले मोहम्मद जाविद बुधवार को 18 राज्यों में अपने खास तौर से डिजाइन किए गये वाहन से करीब 10 हजार किमी की यात्रा तय करने के बाद पटना पहुंचे। इस जागरुकता यात्रा को वह अपने मार्गदर्शक वैद्यनाथन सिंगरमन को श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित कर रहे हैं।
 
दुर्घटना के बाद जल्दबाजी में लापरवाही से अस्पताल पहुंचाये जाने के कारण उन्होंने स्पाइनल कॉर्ड के चोटिल होने से अपने पैरों का नियंत्रण भी खो दिया। मो. जाविद पिछले 11 वर्षों से व्हील चेयर पर हैं और दृढ़ आत्म विश्वास, जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण एवं पुनर्वास/ रिहैबिलिटेशन के बाद स्पाइनल कॉर्ड इंजरी पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से यात्रा कर रहे हैं। इसी कड़ी में वह  उत्तर-पूर्वी राज्यों से होते हुए कल 14 अप्रैल को पटना पहुँच रहे हैं जहां अपनी मुहिम को मां ब्लड बैंक परिसर, दरियापुर, पटना में प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से अपराह्न 12.30 बजे, वृहस्पतिवार, 14 अप्रैल 2022 को पूरा करके बनारस के लिए प्रस्थान कर गए।
 
प्रेस कांफ्रेंस में द गंगा फाउंडेशन के पीअर मेंटर पटना निवासी अनुराग कुमार सांकृत्यायन ने कहा कि हमारे देश में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की जागरूकता बहुत कम है। इससे ग्रस्त लोगों को एक गुणवत्ता वाले जीवन जीने के लिए पुनर्वास की आवश्यकता होती है लेकिन बिहार में इनपेसेंट पुनर्वास की सुविधा नहीं है जिसके कारण बिहार में अभी ऐसे बहुत स्पाइनल कॉर्ड इंजर्ड व्यक्ति हैं जो अपने कमरे से 20 साल से अधिक समय से नहीं निकल पा रहे। आइ जी आइ एम एस, पटना में फिजिकल मेडिसिन और रिहैबिलिटेशन डिपार्टमेंट में उत्कृष्ट चिकित्सक और सुविधाएं हैं जहां स्पाइनल कॉर्ड के चोट से जूझ रहे लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही  इनपेसेंट पुनर्वास केंद्र स्थापित किया जाए।
 
अनुराग को 26 जनवरी 2014 के दिन चिरैयाटांड़ फ्लाइओवर पर दो गुटों के बीच गोलीबारी में गोली लगी थी जिससे उनका स्पाइनल कॉर्ड के चोट के कारण कंधे के नीचे शरीर लकवाग्रस्त हो गया था। वह बिहार में 2015 से इस द स्पाइनल फाउंडेशन के स्टेट को-ओर्डिनेटर के रूप में इस अभियान में लगे हैं।

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Author: undekhilive

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