पूरे देश में अयोध्या के बाद रामनवमी के दिन महावीर मन्दिर, पटना में श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिाक होती है।यह जानकारी न्यास के सचिव किशोर कुणाल ने दिया। कुणाल ने बताया कि इस एक दिन श्रद्धालुओं की संख्या तीन से पाँच लाख तक हो जाती है।
इस वर्ष श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने में मन्दिर प्रबन्धन के द्वारा निजी सुरक्षा एजेंसी के लगभग 250 जवानों को लगाया गया है। महावीर मन्दिर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है।मन्दिर का पट्ट २ बजे सुबह से १२ बजे रात्रि तक पूरे २२ घंटा खुला रहेगा।
महावीर मन्दिर में जो प्रसाद माला आदि चढ़ाने आएंगे उन्हें पंक्तिबद्ध होकर उत्तरी द्वार से प्रवेश करना होगा। मन्दिर के उत्तरी द्वार से जीपीओ गोलम्बर तक घेराबंदी कर छाया की व्यवस्था की गयी है। इसमें दो कतारें – एक पुरुषों के लिए तथा दूसरी महिलाओं के लिए बनायी गयी है। जीपीओ गोलम्बर के बाद यह पंक्ति सीधे पश्चिम दिशा में आर ब्लाॅक चौराहा की ओर जायेगी . केवल दर्शन करनेवाले भक्तों के लिए ७ बजे प्रातः से दर्शन सुलभ होगा। वे पूर्वी प्रवेश द्वार से पंक्तिबद्ध होकर परिसर में प्रवेश करेंगे।
प्रत्येक वर्ष की तरह मन्दिर प्रबन्धन के द्वारा मन्दिर के उत्तरी द्वार से जीपीओ गोलम्बर तक गर्मी से बचाव के लिए छाया की व्यवस्था की गयी है।उनकी सुविधाा के लिए पंखे भी लगे रहेंगे। शरबत एवं पानी की व्यवस्था जगह-जगह पर यथेष्ट रूप से की गयी है।
पण्डाल के अन्दर क्लोज सर्किट टीवी पर मन्दिर के भीतर का दृश्य दिखाई पड़ेगा जिससे पंक्तिबद्ध हुए भक्तों को विग्रह के दर्शन के साथ-साथ पंक्ति की त्वरित गति का आभास होता रहेगा।
भक्तों की सुविधाा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त 10 पुजारी अयोध्या से बुलाये गये हैं।
जो भक्त हनुमानजी का दर्शन कर भू-तल से ही वापस जाना चाहेंगे, वे पूर्वी निकास द्वार से बाहर निकलेंगे। जो भक्त द्वितीय एवं तृतीय तल पर जायेंगे, उन्हें ऊपर से नीचे जाने के लिए दक्षिण की ओर राम-जानकी मन्दिर के ऊपर से सीढ़ी से उतर कर स्टेशन की ओर बाहर निकलने की सुविधा होगी।
मन्दिर की ओर से स्वयंसेवक, सुरक्षाकर्मी श्रद्धालुओं को पंक्तिबद्ध होने तथा पंक्ति को सुव्यवस्थित करने के लिए तैनात किये गये हैं। इसके अतिरिक्त स्थानीय पुलिस-प्रशासन की भी व्यवस्था की गयी है। मन्दिर-परिसर के बाहर दो प्राथमिक उपचार केन्द्र एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था है, ताकि श्रान्त, क्लान्त भक्त को तुरंत राहत दी जा सके।
नैवेद्यम् लड्डू की बिक्री हेतु मध्य-रात्रि से 13 काउन्टर बाहर लगाये जायेंगे। मन्दिर के भीतर का स्थायी काउन्टर उस दिन तब तक बन्द रहेगा, जब तक भक्तों की कतार मन्दिर के बाहर रहेगी। सन्ध्या में मन्दिर के भीतर का नैवेद्यम् काउण्टर खुलने की संभावना है।
मन्दिर में सुबह 11.50 से दोपहर 12.20 बजे तक भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जायेगा। इस पूजा के बाद तीनों ध्वज बदले जाएंगे। इसके बाद जन्मोत्सव आरती होगी। इस अवसर पर निर्मित विशिष्ट रोट-प्रसाद का वितरण होगा।
जो भी समिति जुलूस लेकर मन्दिर में सन्ध्या के समय आते हैं, उनसे आग्रह है कि वे 7 बजे सन्ध्या से 9 बजे के बीच न आवें, क्योंकि यह आरती का मुख्य समय है।
१२ . व्यक्तिगत रूप से हनुमानजी के ध्वज की पूजा करने की अनुमति नहीं दी गयी है।
रामचरितमानस का नवाह पाठ जो कलश-स्थापना के साथ प्रारम्भ हुआ, रामनवमी के दिन रात्रि 9 बजे हवन के साथ इसका समापन होगा।
रामनवमी के दिन हीं मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम का आविर्भाव अपने चरित के द्वारा संसार को उच्चतम नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने के लिए हुआ था।





