ऊपर यह हंसती-मुस्काती तस्वीर देखनेवालों के गम भी दूर करनेवाली है। देखिए नेत्रहीन बच्चियां कितनी खुश हैं। बाल बुद्धिवालों को लगेगा कि ये बच्चियां गिफ्ट मिलने से खुश हैं, पर यह बात बिल्कुल नहीं है। आप भी किसी को गिफ्ट देकर देख लीजिए। कई बार तो गिफ्ट लेने से ही लोग इनकार कर देंगे। कई लोग लेंगे, पर मुस्करा नहीं पाएंगे। कई मुसकुराएंगे, तो वह मुस्कान औपचारिक होगी।
इस चित्र में नेत्रहीन बच्चियों के चेहरे पर जो मुस्कान है, वह औपचारिक नहीं है। बहुत खास है। वे ह्दय से खुश हैं। बच्चियों को गिफ्ट दे रहे नितिन जैन हैं। वे भी दिल से खुश हैं। ऐसी मुस्कान गिफ्ट के कारण महीं, बल्कि उसके भीतर के प्यार और अपनेपन के कारण है।
नितिन जैन पिछले कई वर्षों से पटना के कुम्हरार स्थित अंतर्ज्योति विद्यालय में जाते रहे हैं। हर रविवार को। गर्मी-जाड़ा-बरसात, कुछ भी हो। हर रविवार को इन बच्चियों को बीच पहुंच जाते हैं। किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए यह अनवरत प्रयास ही सच्चा तप है।
इस तस्वीर को देखकर लगा सचमुच जीना इसी का नाम है। आप अगर किसी के चेहरे पर मुस्कान लाते है, तो यही जीना है। वरना अपने में मगन तो सभी रहते हैं, आदमी भी, दूसरे साधारण जीव भी। फिर फर्क क्या है।
अनाड़ी फिल्म में शैलेंद्र के गीत की पंक्तियां याद आ रही हैं-
किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार
किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार
किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार
जीना इसी का नाम है





