CAG रिपोर्ट से सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुली

2005 और 2021 में कोई अंतर नहीं , बिना लाइसेंस के ही चल रहे हैं ब्लड बैंक

पटना में बन रहा है दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल पर, बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति दयनीय

सम्यक न्यूज़, पटना.

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। बिहार विधानसभा में बुधवार को Comptroller and Auditor General of India (CAG) की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2005 और 2021 में कोई अंतर नहीं है। बिहार के जिला अस्पतालों में कुत्ते और सुअरों का बसेरा है। राजधानी पटना का जिला अस्पताल भी Clinical establishment act के तहत क़ानूनी तौर पर पंजीकृत नहीं है. रिपोर्ट में सरकार के क्रिया कलाप पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है।

CAG की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब सूबे के सबसे बड़े अस्पताल PMCH में स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 5500 बेड के दुनिया के सबसे बड़े अस्पताल की नींव रख चुके है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार तो स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियाद ही चरमराई हुई है. 2013 और 2018 के आंकड़ों से पता चलता है कि स्वास्थ्य संकेतक के मामले में बिहार की स्थिति राष्ट्रीय औसत के बराबर भी नहीं है। जिला अस्पतालों में बेड की भारी कमी है। इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (IPHS) की तुलना में बेड की कमी 52 से 92% के बीच थी।

सूबे के सबसे बड़े अस्पताल PMCH में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल

बिहार शरीफ और पटना जिला अस्पताल को छोड़ दें तो 2009 में स्वीकृत बेड के केवल 24 से 32% ही मिले। सरकार ने वर्ष 2009 में इन अस्पतालों में बेड की संख्या को स्वीकृत किया था। 10 साल बाद भी वास्तविक बेड की संख्या को नहीं बढ़ाया गया। जिला अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर की स्थिति भी अच्छी नहीं है। NHM गाइड बुक में निर्धारित 22 प्रकार की दवाओं के सैंपल में औसतन 2 से 8 प्रकार की दवाएं मिली है।

36 जिला अस्पतालों में से 9 में ब्लड बैंक नहीं
CAG की रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑपरेशन थिएटर में आवश्यक 25 प्रकार के उपकरणों के विरुद्ध केवल 7 से 13 प्रकार के उपकरण ही उपलब्ध थे। IPHS के अनुसार, सभी जिला अस्पतालों में 24 घंटे ब्लड बैंक की सेवा होनी चाहिए। लेकिन 36 जिला अस्पताल में से 9 बिना ब्लड बैंक के कार्यरत हैं। वित्तीय वर्ष 2014 से 2020 के दौरान लखीसराय और शेखपुरा को छोड़कर सभी जिलों में बिना लाइसेंस के ब्लड बैंक चल रहे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि निरीक्षण के दौरान केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की टिप्पणी का सरकार ने अनुपालन नहीं किया।

आवश्यक संख्या में डॉक्टरों और स्वास्थकर्मियों की भर्ती सुनिश्चित हो

CAG की रिपोर्ट में ये कमेंट किया गया है कि बिहार के सरकारी अस्पतालों में आवारा कुत्ते घूमते हैं। जहानाबाद जिला अस्पताल परिसर में आवारा कुत्ते देखे गए। अस्पताल में नाले का पानी, कचरा, मल, अस्पताल का कचरा बिखरा मिला। मधेपुरा जिला अस्पताल में अगस्त 2021 में आवारा सुअरों का झुंड दिखा। मधेपुरा जिला अस्पताल में कूड़ा और खुला नाला पाया गया। CAG ने अनुशंसा की है कि आवश्यक संख्या में डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल और अन्य सहायक कर्मचारियों की भर्ती सुनिश्चित हो। जिला अस्पतालों में पर्याप्त मानव बल, दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता की निगरानी की जाए। कैग की रिपोर्ट में नसीहतों की भरमार है लेकिन, किसी सरकार के लिए इसे मानना बाध्यकारी तो नहीं है, यह सरकार की जन संवेदनशीलता पर निर्भर है कि वह जनता की सेवा में वह कितनी तत्पर होती है.

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Author: undekhilive

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