जैन धर्मावलंबियों ने आज जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ पटना के विभिन्न जैन मंदिरों में मनाया। यह जानकारी देते हुए जैन संघ के एम पी जैन ने बताया कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म उप्र के अयोध्या नगर में हुआ था, उनका दूसरा नाम भगवान ऋषभदेव भी है. उनके पिता राजा नाभि राय एवं माता रानी मरू देवी थीं। राजा ऋषभ देव के भरत चक्रवर्ती एवं बाहुबली आदि सौ पुत्र और ब्राह्मी एवं सुंदरी नाम की दो बेटियां थी। भगवान आदिनाथ ने राज दरबार मे नृत्य करते-करते नीलांजना की मृत्यु को होते हुए देखा। उसी समय राजा ऋषभदेव को वैराग्य हुआ और वह अपना पूरा राजपाट अपने दोनों बेटों भरत एवं बाहुबली को सौंप कर वन को चले जाते हैं। जहां वह 6 महीने तक घोर तपस्या करते हैं। उन्हें 6 महीने तक आहार की विधि नहीं मिलती। 1 वर्ष बाद अक्षय तृतीया के दिन उनके आहार होते हैं। राजा श्रेयांश के यहां गन्ने के रस के द्वारा आदिनाथ मुनि के आहार होते हैं। कृष्ण चतुर्दशी को आदिनाथ भगवान कैलाश पर्वत से मोक्ष को चले जाते हैं।

एम पी जैन ने बताया कि आज भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक के दिन मीठापुर , कांग्रेस मैदान एवं अन्य दिगम्बर जैन मंदिरों में आदिनाथ भगवान की पूजा की गई तथा शांतिधारा किया गया।
मुरादपुर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में संजय जैन ने शांतिधारा किया। अभिषेक एवं पूजन में सुबोध जैन फंटी , सुनील एवं सुशील गंगवाल, राजेश जैन, सुबोध छाबड़ा, कांता जैन, मीना जैन, अनिता जैन, सरोज जैन सहित अन्य लोग शामिल थे।
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