पटना। श्री कमलदह जी दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र, महामुनि सेठ सुदर्शन स्वामी की निर्वाण स्थली पर भव्य मानस्तंभ निर्माण के लिए भूमि शुद्धिकरण एवं शिलान्यास समारोह पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। यह पटना स्थित सभी दिगम्बर जैन मंदिरों में स्थापित होने वाला पहला मानस्तंभ होगा। इस पवित्र अवसर पर पुणे से पधारे जैन ब्रह्मचारी साकेत भैया जी एवं रामगढ़ उत्तर प्रदेश से पंडित अखिलेश जैन ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए।
ब्रह्मचारी साकेत भैया जी ने इस अवसर पर कहा कि मंदिर में प्रवेश करने से पूर्व मानस्तंभ को देखने से श्रावकों का अहंकार समाप्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में समर्पण, श्रद्धा एवं आस्था के साथ प्रवेश करना चाहिए और अपने मान, कषाय एवं अहंकार को मंदिर के बाहर ही छोड़ देना चाहिए। मानस्तंभ, जिनेन्द्र देव की महिमा दर्शाने का एक महत्वपूर्ण प्रतीक होता है, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान करता है।
स्वर्ण, रजत और नवरत्न शिला का प्रतिष्ठापन
पूजा विधि के अंतर्गत मानस्तंभ की आधारशिला में स्वर्णशिला, रजत शिला और नवरत्न शिला प्रतिष्ठापित की गई। यह आयोजन जैन धर्म के शास्त्रीय नियमों के अनुरूप संपन्न हुआ।
चार प्रतिमाएं होंगी स्थापित
बिहार स्टेट दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के उपाध्यक्ष अजय जैन ने बताया कि यह मानस्तंभ 21 फीट ऊंचा होगा, जिस पर चार दिशाओं में भगवान की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। वहीं कमेटी के मानद मंत्री पराग जैन ने बताया कि इस स्तंभ पर जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के आशीर्वाद से हुआ शिलान्यास
इस मानस्तंभ का शिलान्यास आचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं मुनि सुप्रभ सागर जी महाराज की प्रेरणा से जैन ब्रह्मचारी साकेत भैया जी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
पूजा-अर्चना में श्रद्धालुओं की भागीदारी
इस शुभ अवसर पर जयपुर से पधारे राजेंद्र जैन सरावगी, एमपी जैन, डॉ. गीता जैन, मिथिलेश जैन, रेनू जैन, धीरज जैन, सोनू जैन, वीणा जैन गंगवाल, ऋचा जैन और संजय जैन सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि यह भव्य आयोजन जैन धर्म की आस्था, श्रद्धा और समर्पण का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। मानस्तंभ की स्थापना से पटना के जैन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त होगा तथा यह भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए धर्म एवं संस्कारों का प्रेरणास्रोत बनेगा।
