पटना से हाजीपुर पहुँचिए सिर्फ पंद्रह मिनट में

सम्यक न्यूज़, पटना.

जी हाँ, चौंकिए नहीं. 24 सालों के लम्बे इंतज़ार के बाद महात्मा गाँधी सेतु पर वाहन फिर से सरपट भागेंगे और पटना से हाजीपुर का सफ़र मात्र 15 मिनट में पूरा कर सकेंगे. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मंगलवार को महात्मा गांधी सेतु के पूर्वी लेन का लोकार्पण करेंगे. सुपर स्ट्रक्चर बदलकर सेतु के पश्चिमी लेन पर आवागमन जून 2020 में ही चालू कर दिया गया था. पूर्वी लेन का जीर्णोद्धार किया जा रहा था. मंगलवार से एक बार फिर इस पुल के दोनों लेन पर एक साथ आवाजाही शुरू हो जायेगी.
मंगलवार को बिहार के दौरे पर आ रहे केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी करीब 13,585 करोड़ की लागत वाली 15 परियोजनाओं का भी उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे. प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे श्री गडकरी पटना पहुंचेंगे. पटना एयरपोर्ट पर लैंड करने के बादवे सीधे सीएम हाउस जाएंगे. वहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे. इसके बाद दोनों नेताओं की मौजूदगी में 13,585 करोड़ की लागत वाली 15 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्‍यास किया जाएगा. इसको लेकर हाजीपुर में खास कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. इसमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहेंगे.

पूर्वी लेन की मरम्मत का दृश्य

महात्मा गाँधी सेतु के ज़र्ज़र होने से पटना से हाजीपुर ही नहीं, पूरे उत्तर बिहार का सफ़र एक दु:स्वप्न बन गया था. इस पुल से गुजरने में रूह कांप जाती थी. पुल पर महाजाम में फंसकर न जाने कितने मरीज़ छटपटाकर स्वर्ग सिधार गए. समय पर नहीं पहुँच पाने से अनगिनत दूल्हे शुभ मुहूर्त में विवाह नहीं कर पाए. कितने बच्चे तो इस पुल पर ही पैदा हो गए. अब इन दुश्वारियों से मुक्ति मिल सकेगी.

सेतु के पुराने दिनों की जगमगाती तस्वीर

1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने लगभग 5.5 किलोमीटर लम्बे इस इस पुल का उदघाटन हाजीपुर छोर से किया था. पटना छोर की तरफ कम अधूरा था. हालाँकि इस पुल की स्वीकृति भारत सरकार ने 1969 में ही दे दी थी. निर्माण कार्य 1972 से 1982 तक चला. दस सालों में 87.22 करोड़ से निर्मित इस सेतु को उत्तर बिहार की लाइफ लाइन कहा जाता था. निजी कंपनी गैमन इंडिया ने इसके निर्माण किया था. लगभग 25 वर्षों तक सेवा देने का बाद देख-रेख, मरम्मत के अभाव में पुल ज़र्ज़र होने लगा और 1998 से यह पुल सरकार और जनता – दोनों के लिए सरदर्द बन गया. हालाँकि इसके सभी 46 पिलर मज़बूत थे, ऊपरी ढांचा कमज़ोर होने लगा था. एक अनुमान के अनुसार इस पुल पर उस समय 40 हज़ार वाहनों के दबाव था. इसकी उपयोगिता और महत्ता को देखते हुए इसके पुनर्निर्माण की योजना बनाई गयी और काफी तकनीकी माथापच्ची और पुल विशेषज्ञों की राय बाद 2016 में पश्चिमी लेन को बनाने का कम शुरू हुआ. जून 2020 में इस लेन को चालू कर दिया गया. ठीक दो साल बाद पूर्वी लेन के उदघाटन के बाद लोगों को काफी राहत मिलेगी. इसके निर्माण पर करीब 1800 करोड़ की लागत आई है.

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Author: undekhilive

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