अगले साल अप्रैल में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती करेंगे उद्घाटन
350 साल पुराने सती माई स्थान से सटे बन रहा मन्दिर
सम्यक न्यूज़, पटना.
विगत तीन दशकों से गोवर्धन मठ पुरी पीठ के शंकराचार्य पद पर आसीन स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी की जन्मस्थली मधुबनी जिले के हरिपुर बख्शी टोल में मनसा देवी मन्दिर का ढांचा तैयार हो चला है। जगद्गुरु शंकराचार्य की इच्छा से बन रहे विषहरा माता के इस मन्दिर का गर्भगृह बनकर तैयार हो गया है। 70 फीट लंबे और 33 फीट चौड़े निर्माणाधीन मन्दिर के गर्भ गृह की मुख्य खासियत यह है कि इसे लाल ईंटों से तराशकर बनाया गया है। भुवनेश्वर के लिंगराज मन्दिर की तर्ज पर यह मन्दिर उड़ीसा शैली में बनाया जा रहा है। अप्रैल 2023 तक मन्दिर के पूरी तरह बनकर तैयार हो जाने की आशा है जिसका उद्घाटन करने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती स्वयं आयेंगे.
मन्दिर का निर्माण कराने वाली संस्था शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की संस्थापक सचिव प्रोफेसर इंदिरा झा ने बताया कि मन्दिर में कुल 20 पिलर हैं। 24 फरवरी 2021 से उड़ीसा के कारीगर तीन-रात मन्दिर निर्माण में जुटे हुए हैं। मन्दिर का 59 फीट ऊंचा मुख्य गुम्बद बनकर तैयार हो गया है। 35 फीट ऊंचाई का दूसरा गुम्बद अगले एक सप्ताह में तैयार हो जाएगा। मनसा देवी मन्दिर के दोनों गुम्बदों पर उड़ीसा के कारीगर कुल 8 शेरों की कलाकृति बनाएंगे जबकि मन्दिर के प्रवेश द्वार और मुख्य पिलरों पर भी कुल 9 शेरों की कलाकृति बनेगी। इस प्रकार 17 शेर कलाकृति के रूप में मनसा देवी मन्दिर की शोभा बढ़ाएंगे। जबकि अन्य पशु-पक्षियों और प्राकृतिक स्वरूपों की 12 कलाकृतियां बिहार में उड़ीया वास्तुकला की झांकी प्रस्तुत करेंगे। अप्रैल 2023 तक मन्दिर के पूरी तरह बनकर तैयार हो जाने की आशा है जिसका उद्घाटन करने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती स्वयं आयेंगे. 17 वर्ष की अवस्था में अपनी जन्मभूमि छोड़कर संन्यास लेने के बाद जगद्गुरु पहली बार अपनी जन्मभूमि में पधारेंगे।

प्रोफेसर डॉ इंदिरा झा ने बताया कि हरिद्वार में स्थित मनसा देवी मन्दिर में स्थापित प्रतिमा की तरह ही इस मन्दिर में मनसा माता की प्रतिमा स्थापित होगी। सती माई स्थान लगभग 350 वर्ष पुराना बताया जाता है। पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती इसे सिद्ध पीठ मानते हैं। उन्होंने कई अवसरों पर हरिपुर बख्शी टोल के सती माई स्थान का जिक्र करते हुए कहा है कि उनको उसी स्थान में सिद्धि प्राप्त हुई और सती माता का आशीर्वाद उनके साथ हमेशा बना हुआ है। मन्दिर के निकट लगभग 15 एकड़ क्षेत्रफल का सतियार पोखर भी है।
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