संतों के गुणगान में रोज किताबें छपती हैं, पर क्या कोई ऐसे संत हैं, जिन्होंने आम लोगों के गुणों की सराहना में किताब लिखी हो।
कुमार अनिल
किसी की सराहना करना बहुत कठिन काम है। किसी ऑफिस का बॉस कभी नहीं कहता कि उसने किसी कर्मचारी से कुछ सीखा है। बॉस का अहंकार आड़े आ जाता है। संतों की सराहना में हजारों किताबें हैं। इसमें सराहना करनेवाले का लाभ ही है। इसके विपरीत आपने किसी संत की ऐसी किताब नहीं देखी होगी, जिसमें उन्होंने साधारण जन, आम लोगों की सराहना की हो।
देश में शायद आचार्यश्री चंदना जी अकेली संत हैं, जिन्हों साधारण जन की सराहना में एक पूरी पुस्तक ही लिख दी। आचार्यश्री जैन धर्म की पहली महिला आचार्य हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं। उनकी एक पुस्तक है-मेरे देवदूत।
आचार्यश्री चंदना जी ने 200 पृष्ठों की अपनी इस पुस्तक में उन घटनाओं, साधारण लोगों की बातों का उल्लेख किया है, जो अमूल्य है। उन्होंने पुस्तक का नाम दिया है मेरे देवदूत। दूसरों की नजर में साधारण लोग हैं, पर उन्हें आचार्यश्री ने देवदूत कहा है। पुस्तक जितना शिक्षाप्रद है, उतना ही रोचक भी। एक बार में पढ़ जानेवाली पुस्तक।
आचार्यश्री ने पुस्तक में बंगाल के गांव की साधारण औरतों की असाधारण बातों का उल्लेख किया है। लिखती हैं-एक बार वे विहार करते हुए बंगाल के एक गांव में पहुंचीं। वे एक पेड़ के नीचे बैठ गईं। उन्हें देख गांव की कुछ बहनें आ गईं। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के लिए बहन शब्द का उपयोग किया है। महिलाओं को जब पता चला कि वे पैदल ही चलती हैं, तो उन्हें आश्चर्य हुआ। एक महिला ने पूछा कि आप भोजन कहां करेंगी, तो उन्होंने जवाब दिया कि जो शुद्ध शाकाहारी होंगे, उनके यहां से हम भोजन लेकर आते हैं। महिलाओं ने कहा कि आप बंगाल के गांवों से गुजर रही हैं, यहां शायद ही कोई शाकाहारी परिवार मिले। आचार्यश्री ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं। हमारे साथ गाड़ी है। गाड़ी में रसोई का सामान है। साथ में खाना बनानेवाले आदमी भी हैं। वे बना देंगे।

जब उन बहनों ने सुना कि आचार्यश्री के साथ गाड़ी भी है, जो पीछे से आ रही है, तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। हमारा सामान गाड़ी से आ रहा है और हम खुद पैदल चल रहे हैं, यह बात उन्हें बेहद असंगत लगी। आचार्यश्री लिखती हैं- एक बहन ने पूछ ही लिया-अगर आपका सामान गाड़ी में आ सकता है, तो आपको गाड़ी में बैठने में क्या एतराज है?
आचार्यश्री लिखती हैं- इस प्रश्न से मैं स्तब्ध थी। मेरे पास कोई कोई जवाब नहीं था। उन अशिक्षित ग्रामीण महिलाओं को समझाने के लिए मेरे पास कोई ज्ञान भी नहीं था। उन महिलाओं के प्रश्न का समाधान मैं आज तक खोज नहीं पाई हूं कि अगर गाड़ी में सामान आ सकता है, तो हम गाड़ी से क्यों नहीं आ सकते?
अब नई बात यह है कि आचार्यश्री चंदना जी भगवान महावीर के विचारों को दुनियाभर में फैला रही हैं। वे 25 देशों की हवाई यात्रा कर चुकी हैं।
पटना सिटी में रक्तदान शिविर शनिवार को





