कल, जो अनिश्चित है, उसी के बारे में क्यों सोचते हैं हम

जो मिला उसको जी नहीं सके और जो नहीं मिल सका……

स्वामी आनंद सुरेन्द्र, पटना

जिंदगी बड़ी बेबूझ चीज है। कल, जो अनिश्चित है, उसके बारे में सोचकर हम अपना आज जी नहीं पाते हैं। जो वक्त आज निकल जायेगा, वह दुबारा नहीं आएगा। दिक्कत ये है कि ये सारी बातें हम सभी समझते हैं, पर हमें जो ध्यान रखना चाहिए, वह नहीं रख पाते हैं।

बात कुछ भी हो ,कितनी भी गंभीर हो, वह हमारे जीवन से बड़ा नहीं है। किसी भी हालत में हमें यह नहीं भूलना चाहिए पर, हम छोटी समस्याओं में ही इस बात को भूल जाते हैं। जबकि बड़ी से बड़ी दिक्कत में भी इस बात को याद रखना था कि हमारा जीवन सबसे बड़ा है, अनमोल है ।
आज भले ही चीजें अनुकूल नहीं है पर,एक दिन फिर से चीजें सामान्य होंगी। प्रकृति का मूल नियम भी हमें यही संदेश देता है।

जो मिला उसको जी नहीं सके और जो नहीं मिल सका,……

अब तक जो जीवन हमने जीया है, उसकी थोड़ी समीक्षा करें। वह इसलिए कि अब जो शेष जीवन हमे जीना है उसके बारे में थोड़ा हम समझ सकें। हर व्यक्ति अपने जीवन की योजना बनाता है. उसमे से कुछ पूरा होता है और कुछ पूरा नहीं हो पाता है, जो इच्छा पूरी होती है, उसे हम जी तो नहीं ही पाते हैं, महत्त्व भी नहीं देते हैं और जो इच्छा पूरी नहीं होती है, उसके प्रति हम पूरा ध्यान लगाए रहते हैं।

जो मिला उसको जी नहीं सके और जो नहीं मिल सका उसमें हम खोए ही रह गए। सामान्य रूप से ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जिसकी सारी इच्छाएं पूरी हुई हों। तो अब शेष जीवन अगर संभव हो तो थोड़ा हट कर जीना चाहिए। ऐसे हम अपनी आदत से मजबूर हैं पर, कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है।

हमें अबतक जो मिला है उसके प्रति धन्यवाद और अहोभाव से सोचना प्रारंभ करना है। उसको पाने में जो हमने समय और श्रम लगाया उसको स्मरण करके उसका आनंद लेने की कोशिश करना है। मेरी बात थोड़ी अजीब लगेगी,पर कोशिश करेंगे तो मेरा इशारा समझ में आना कठिन नहीं है। फिर सब वही है,पर कुछ बदलाव भी आना शुरू हो गया है। यही बदलाव हमें जीवन का वास्तविक आनंद और नई ऊर्जा देना प्रारंभ करेगा।

(लेखक ओशो ध्यान केंद्र, पटना से जुड़े हुए हैं. )

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Author: undekhilive

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