फाउंडेशन एकेडमी में मनाए गए द्वितीय वार्षिकोत्सव का प्रथम दिवस

फाउंडेशन एकेडमी

आईआईटी पटना, बिहटा परिसर, पटना

दिनांक—19, दिसंबर, स्थानीय ‘फाउंडेशन एकेडमी’ विद्यालय में द्वितीय वार्षिकोत्सव—उन्मेष(दि अनफोल्डिंग/ प्राकट्य)बहुत ही धूमधाम से मनाया गया।वार्षिकोत्सव के प्रथम दिवस के शुभ अवसर पर डॉ.विश्वरंजन( रजिस्ट्रार—निबंधक—भारतीय प्रौद्यौगिकी संस्थान, पटना) मुख्य अतिथि के रूप में शोभायमान थे…इसके अतिरिक्त डॉ. कर(पीआईसी विद्यालय), डॉ. संजय कुमार(उपनिबंधक,सहयोगी डीन, शैक्षणिक डीन), डॉ. सीबी सिंह(निदेशक—नॉलेजग्राम स्कूल व संस्थापक—आर्यावर्त सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स), राधिका महोदया(अध्यक्षा—एएसएससी एवं पटना के विभिन्न विद्यालयों की प्राचार्या), श्रीमती मिताली मुखर्जी(प्राचार्या—मिलेनियम स्कूल) तथा श्री हिमांशु पांडेय(प्राचार्य—शोषित समाधान केंद्र) मुख्य सचिव, विद्यालय प्रबंधन समिति के अन्यान्य सदस्यगण एवं अभिभावकवृंद भी उपस्थित थे। इस सारस्वत सुअवसर पर डॉ. सीबी सिंह तथा श्री अमितप्रकाश(निदेशक—फाउंडेशन एकेडमी, पटना) को विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किया गया!

हमारे विद्यालय का वार्षिकोत्सव अपने-आप में अद्वितीय व अनुपम होता है!

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से किया गया; जो प्रतीक होता है—असीम ज्ञानवर्धन एवं अभिवृद्धि का…तत्पश्चात आगत विशिष्ट अतिथियों का यथोचित सम्मान किया गया। अतिथियों की महती उपस्थिति विद्यालय की सुषमा बढ़ा रही थी!

प्राचार्या श्रीमती रमा चक्रवर्ती के उद्बोधन में सभी बच्चों और लोगों की कल्याण भावना के संग विद्यालय की उपलब्धियों की चर्चा थी; तो मुख्य अतिथि ने बच्चों को शिक्षा के महत्व एवं उसके सुपरिणामों के बारे में बताया…साथ ही उन्होंने अपने उत्साही भाषण में बच्चों को उनके पसंदीदा क्षेत्रों में बढ़ने पर बल देते हुए सकारात्मक सोच व शिक्षा के लिए उन्हें उत्प्रेरित भी किया!

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए श्री अनुदिप दे तथा शायक देव मुखर्जी के संगीत निर्देशन में स्वागत गान तथा श्रीमती श्राबोनी मुखर्जी के नृत्य निर्देशन में स्वागत नृत्य की भावविभोर प्रस्तुति दी गई, इस प्रस्तुति में अनंत देव मुखर्जी ने तबले पर संगत किया।

श्री हर्ष के निर्देशन में शिव तांडव स्त्रोतम पर पिरामिड फ्यूजन की प्रस्तुति दी गई और बच्चो ने खूब तालियां बटोरी।

कार्यक्रम में श्री बीताशोक दासगुप्ता के निर्देशन तथा श्री राहुल के सह निर्देशन में अँगरेज़ी नाटक ‘जूलियस स़ीजर’ ने जहाँ समाँ बाँध दिया; वहीं ‘पिरामिड’ ने बताया कि संगठनात्मक शक्ति कितनी अनमोल होती है!

कत्थक, भरतनाट्यम तथा ओडिसी नृत्यों के शास्त्रीय सम्मेल से भारतीय वैशिष्ट्य एवं पारंपरिक कलाकारिता का अनुपमेय आकर्षण उत्पन्न हुआ…संग ही आँग्ल गीत ने छात्रों की बहुमुखी प्रतिभा के मुखर रूप के दर्शन कराए!
इसी क्रम में श्री साइबल आचार्य के निर्देशन में ‘मर्चेंट ऑफ़ वेनिस’ ने दर्शकों का ध्यान अतिशय आकृष्ट किया; तो वैश्विक लोक नृत्यकलाओं से अफ़्रीका, स्पेन, अरब आदि स्थानों के विविध सांस्कृतिक रूप प्रकट हुए!
विभिन्न झाँकियों में जहाँ बिहार की सांस्कृतिक विरासत छलक रही थी… वहीं विकसित भारत के अनगिनत आयाम भी दृष्टिगोचर हो रहे थे! समग्र कार्यक्रम की संचालक श्रीमती नेहा के द्वारा संपन्न हुई।

अंततः धन्यवाद ज्ञापन से उन सभी भावनाओं का सम्मान किया गया; जो अभिभावकों,अतिथियों व छात्रों के साथ उपस्थित सभी सुधी जनों के नेत्रों में भरे पड़े थे…विशेषकर बच्चों के प्रति आभार प्रकट किया गया…जिनके द्वारा प्रस्तुत रंगारंग कार्यक्रम ने सबको चमत्कृत कर दिया था!
राष्ट्रगान की ओजस्विता के संग कार्यक्रम का पटाक्षेप हुआ!

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Author: undekhilive

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