पटना। बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स में जैन समाज की सुशीला जैन बैद को पटना जैन संघ ने वर्षी तप करने पर सम्मानित किया। जैन संघ के अध्यक्ष प्रदीप जैन ने बताया कि वर्षी तप आराधना में चार सौ दिनों तक लगातार एक दिन छोड़कर उपवास किया जाता है जैन अनुयायियों की ओर से इस व्रत को पूरे 13 माह तक एक दिन को छोड़कर किया जाता है। यह तप ही वर्षी तप के नाम से दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसमें एक दिन भोजन किया जाता है और दूसरा दिन भोजन को पूर्ण रूप से त्याग कर उपवास किया जाता है। 13 माह की इस तपस्या को व्रत के रूप में करके आखातीज के दिन पारण किया जाता है। जैन धर्म में इसका विशेष महत्व है। इसका सीधा संबंध जैन समाज के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जी से है। जैन समुदाय में इसे सबसे बड़ा तप कहा गया है। पटना जैन समाज मे सुशीला बैद इस वर्ष वर्षी तप करने वाली अकेली महिला हैं। सुशीला जी ने बताया कि उन्हें इस व्रत की प्रेरणा आचार्य महाश्रमण जी से मिली। इसको करने में इनके पति तनसुख बैद का पूरा सहयोग मिला। यह व्रत सुशील जी एक बार पहले भी कर चुकी हैं।
वर्षी तप पारणा से संबंधित एक कथा है, जिसमें जैन समाज के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को लगभग 13 माह के बाद भिक्षा मिली थी। इसमें उनको गन्ने का रस पीने को मिला था। उनके सुपौत्र श्रेयांश कुमार द्वारा ऋषभ देव को इस रस की प्राप्ति हुई थी। इसलिए वर्षी तप करने वाले भक्त इस दिन गन्ने के रस से पारणा करते आ रहे हैं। बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स में सुशीला बैद को कई संस्थाओ ने सम्मानित किया। सम्मानित करने में बिहार अग्रवाल महिला सम्मेलन की अध्यक्ष डॉ. गीता जैन, दिगम्बर जैन महिला मंडल की अध्यक्ष सरला छाबड़ा, आशा बिहार की अध्यक्ष सरोज पाटनी, गुजराती समाज के रमेश कामदार, तेरापंथ समाज की अध्यक्ष पूनम सिंघी, बिहार चैम्बर के उपाध्यक्ष मुकेश जैन, मां वैष्णव देवी सेवा समिति के मुकेश हिसारिया एवं प्रकाश पुगलिया, मनोज बेगानी, सुबोध जैन, रीता, उमेश जैन, निर्मल सुराणा, संतोष गेलड़ा, मांगीलाल वोहरा और अरुण जैन समेत दर्जनों लोगों ने सम्मानित किया।





