पटना। अक्षय तृतीया पर मीठापुर एवं कदमकुआं स्थित दिगम्बर जैन मंदिरों में शनिवार को सैकड़ों को गन्ने का रस पिलाया गया। जैन समाज के एमपी जैन ने बताया कि जैन धर्म में अक्षय तृतीया का इतिहास जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर
भगवान ऋषभदेव से जुड़ा हुआ है।

वैसाख शुल्क पक्ष की तृतीया के दिन ही जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव जी भगवान ने मुनिराज की अवस्था में 13 महीने के कठिन निरंतर उपवास (बिना जल का तप) के बाद हस्तिनापुर में राजा श्रीयांश के हाथ से इक्षु (गन्ने) के रस को पीकर अपना उपवास समाप्त किया था। जैन धर्म में मान्यता है कि जिस पात्र से गन्ने का रस पिलाया गया, वह अक्षय हो गया और उसमें का गन्ने का रस समाप्त नही हुआ। आज भी बहुत जैन उपवास कर अक्षय तृतीया पर गन्ने का रस पीकर उपवास समाप्त करते हैं।

अक्षय तृतीया पर जैन मंदिरों में भगवान ऋषभदेव का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। मीठापुर दिगम्बर जैन मंदिर में अध्यक्ष बिजय जैन कासलीवाल द्वारा शांतिधारा किया गया। भगवान को प्रथम कलश राजकुमार पाटनी द्वारा एवं पूजा सुनील बड़जात्या, चिरंजी लाल कासलीवाल, रिंकु पांड्या, पारस जैन, संदीप जैन, अशोक जैन, आनन्द जैन सहित अन्य द्वारा किया गया। गन्ने का रस सभी को ओम प्रकाश टोंग्या के सौजन्य से पिलाया गया। उधर कदमकुआं स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में दिगम्बर जैन पार्श्वनाथ महिला मंडल की तरफ से करीब 500 लोगों को गन्ने का रस पिलाया गया। मंडल की अध्यक्ष सरला जैन ने बताया कि महिलाएं बहुत ही खुशी से अपने हाथों से लोगों को गन्ने का रस पिलाकर अपने मन के भाव को तृप्त कर रही थीं। साथ ही यहां पर मरुदेवी मंडल की रिचा जैन की तरफ से एक निःशुल्क भोजनशाला अपने ससुर जी के अमृतमहोत्सव जन् मदिवस की खुशी में लगाया गया। भोजनशाला द्वारा जरूरतमंदों को भोजन कराया गया।





