अभी पिछले सप्ताह मीठापुर स्थित नवनिर्मित जैन चैत्यालय में विधि विधान के साथ भगवानकि प्रतिमा स्थापित की गयी थी. इस चैत्यालय में सबकुछ निर्विघ्न चलता रहे इसलिए आज यहाँ 12 घंटे का अखंड णमोकार मंत्र का पाठ जैन श्रद्धालुओं द्वारा किया गया. मीठापुर जैन समाज के अध्यक्ष बिजय जैन कासलीवाल ने बताया की जैन महिला मंडल की तरफ से आज इस णमोकार महामंत्र के पाठ का आयोजन किया गया. आज प्रातः भगवान् का अभिषेक किया गया. अभिषेक के बाद शांतिधारा की गयी. इसके बाद प्रातः साढ़े सात बजे से काफी अधिक संख्या में महिलाओं एवं पुरुषों ने अखंड णमोकार मंत्र का पाठ प्रारंभ किया जो रात्री साढ़े सात बजे तक चलता रहेगा. जैन ने बताया की इसके अतरिक्त जैन भक्तामर जि का भी पाठ अंत में होगा.

जैन समाज के एम पी जैन ने णमोकार मंत्र के बारे में बताते हुए कहा कि संसार मं जन्म लेने वाला प्रत्येक मानव किसी न किसी रूप में अपने इष्टदेव का स्मरण करता है। चाहे वह जैन हो या बौद्ध, सिक्ख हो या ईसाई, हिन्दू हो या किसी अन्य धर्म को मानने वाले हो, अपना-अपना आराध्यदेव सभी को माना है। लगभग सभी धर्म व जाति के लोग अपने से ऊपर कोई महाशक्तिमान् ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं। उन्हीं में से अनादिनिधन जैनधर्म का मूल मंत्र णमोकार मंत्र है। जैन ने बताया कि इस मंत्र का अर्थ है – अरिहंतो को नमस्कार हो, सिद्धों को नमस्कार हो, आचार्यों को नमस्कार हो, उपाध्यायों को नमस्कार हो और लोकों में सर्वसाधुओं को नमस्कार हो। पांच पदों में इन पंचपरमेष्ठियों को नमस्कार किया गया है। इसमें कोई व्यक्ति विशेष का नाम न लेकर गुणों को ही नमन किया जाता है।
आज के इस णमोकार महामंत्र के पाठ में अध्यक्ष विजय जैन कासलीवाल, नरेन्द्र गंगवाल, प्रदीप छाबड़ा जैन, विजय काला जैन, सुनील बड़जात्या, संदीप छाबड़ा, दीपक कासलीवाल, संजय जैन, विजय कासलीवाल राजू पाटनी, कमल छाबड़ा, ममता छाबड़ा, निशा पाटनी, साधना जैन, ममता बडजात्या, नीतू छाबड़ा सहित करीब पचास से अधिक लोग इस णमोकार महामंत्र के पाठ में शामिल थे.





