उपद्रवी “अग्निवीरों” पर सेना, प्रशासन सख्त, नौकरी पर आफत
रेलवे को हुए 1000 करोड़ के नुकसान की भरपाई कौन करेगा
सम्यक न्यूज़, पटना.
सेना में “अग्निपथ भर्ती योजना” के विरोध में हंगामा व उपद्रव करने वाले असामाजिक तत्वों का अब हिसाब-किताब शुरू हो गया है. पहला फरमान तो यही जारी हुआ कि उन्हें जीवन भर सरकारी नौकरी नहीं मिल सकेगी. दूसरा यह कि पहचान में आये और गिरफ्तार उपद्रवियों को पुलिस थाना और कोर्ट का चक्कर लगाना होगा. सेना के अफसरों ने आज स्पष्ट कर दिया कि अनुशासन से कोई समझौता नहीं होगा और इसी महीने से भर्ती प्रक्रिया चालू हो जायेंगीं. इस साल के अंत तक पहले बैच का प्रशिक्षण भी शुरू हो जायेगा. सरकारी नौकरी के ख्वाब संजोये नौजवानों के लिए ये कड़ा सन्देश है.

“अग्निपथ भर्ती योजना” के विरोध में पिछले एक सप्ताह से देश में बवाल, हिंसा और उपद्रव से कोहराम मचानेवाले असामाजिक तत्वों के निशाने पर रेलवे रही जिसे अब तक लगभग 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. रेल यात्रियों की भारी फजीहत तो बेअंदाज़ है. ऐसे फर्जी और उपद्रवी “अग्निवीरों” पर सेना, प्रशासन सख्त हो गया है. पूरे बिहार में हंगामा कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुचने और जन-जीवन अस्त-व्यस्त करने का आरोपों में 16 जून से अब तक कुल 159 प्राथमिकियां दर्ज की जा चुकी हैं, 877 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. पटना में सबसे अधिक 203 से अधिक उपद्रवियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पटना जिले में सबसे अधिक हंगामा व उपद्रव बख्तियारपुर, मसौढ़ी, खगौल, दानापुर, रानी तालाब, खिरीमोड़ आदि थाना क्षेत्र में हुआ. इनमें कई लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है और सैकड़ों अज्ञात को भी आरोपित बनाया गया है जिनकी पुष्टि के लिए CCTV कैमरों को खंगाला जा रहा है. पटना, मसौढ़ी, दानापुर और मनेर के कई कोचिंग संस्थानों पर भी छापेमारी की गयी है. उपद्रव के बाद जिन-जिन थानों में प्राथमिकी दर्ज की गयी है, उनमें दंगा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, हत्या के प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा, अवैध रूप से हथियार रखने आदि की आइपीसी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई है. इन सभी आइपीसी की धाराएं गैरजमानतीय हैं और तीन साल व उससे अधिक की सजा का प्रावधान है.

विधि के जानकारों के अनुसार तीन साल से अधिक की सजा वाले आइपीसी की धारा में केस होने पर सरकारी नौकरी मिलने में काफी परेशानी हो सकती है क्योंकि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान इसे गंभीर माना जाता है. लेकिन, अगर तीन साल से नीचे की सजा होने वाले आइपीसी में केस होने पर आरोपितों को पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान क्लीनचिट दे दी जाती है तो सरकारी नौकरी में परेशानी नहीं होती है. लेकिन, फिर भी पुलिस और डिफेंस से जुड़े विभागों में नौकरी नहीं दी जाती है. सिविल कोर्ट के अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह बताते हैं कि भा.द.वि. की धारा 147,148, 149 के तहत गैरकानूनी ढंग से एकत्र होना और दंगा करना है. इसमें अधिकतम 10 साल तक की सजा है. उसी प्रकार भा.द.वि. की धारा 332, 333, 337 में सरकारी सेवकों को कार्य में बाधा डालने में अधिकतम एक साल तक, भा.द.वि. की धारा 353 में बल का प्रयोग कर सरकारी कार्य में बाधा डालने के तहत दो वर्ष या जुर्माना या दोनों की सजा, भा.द.वि. की धारा 307 हत्या का प्रयास के तहत 10 साल की सजा या जुर्माना या आजीवन कारावास, भा.द.वि. की धारा 27 में आर्म्स एक्ट-अवैध रूप से हथियार रखने के तहत अधिकतम सात साल की सजा है.
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