जैनियों ने मनाया प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का गर्भ कल्याणक

पटना सकल दिगम्बर  जैन समाज द्वारा जैन धर्म के प्रवर्तक व प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभनाथ) का गर्भ कल्याणक महोत्सव  को आज श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर पटना के  जैन मंदिरों में विधि-विधान पूर्वक  भगवान आदिनाथ का अभिषेक कर विश्व कल्याण की कामना की गई।  भगवान आदिनाथ प्रभु की  शांति धारा  की गई। जैन समाज के एम पी जैन ने बताया कि कदमकुआं स्थित जैन मंदिर में शांतिधारा राजकुमार पहाड़िया तथा संदीप जैन ने किया। शांतिधारा के बाद भगवान आदिनाथ की पूजा की गई जिसमे जिनेश जैन, निर्मल बड़जात्या जैन, मनोज जैन, अजित जैन एडवोकेट, विकास जैन, संजीव जैन, मीरा पाटनी जैन, सिम्मी जैन, शोभा छबड़ा जैन, सोनिया जैन, संजू जैन, मधु गंगवाल जैन सहित काफी अधिक संख्या में लोग शामिल हुए।

    उधर मुरादपुर जैन मंदिर में सुबोध जैन फंटी, प्रदीप पहाड़िया, राजकुमार एवं अनिल गंगवाल ने भगवान की शांतिधारा की। भगवान की पूजा में सारिका जैन, अनिता जैन, मीना जैन, बबीता जैन, सरोज जैन , कविता जैन, रेणु जैन सहित अनेकों ने भाग लिया।

     एम पी जैन ने बताया कि भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं।   आदिनाथ ऋषभदेव जी भी कहा जाता है।

   जैन पुराणों के अनुसार राजा नाभिराज के पुत्र ऋषभदेव हुये। भगवान ऋषभदेव का विवाह नन्दा और सुनन्दा से हुआ। ऋषभदेव के 100 पुत्र और दो पुत्रियाँ थी।उनमें भरत चक्रवर्ती सबसे बड़े एवं प्रथम चक्रवर्ती सम्राट हुए जिनके नाम पर इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा। दूसरे पुत्र बाहुबली भी एक महान राजा एवं कामदेव पद से बिभूषित थे। इनके आलावा ऋषभदेव के वृषभसेन, अनन्तविजय, अनन्तवीर्य, अच्युत, वीर, वरवीर आदि 98 पुत्र तथा ब्राम्ही और सुन्दरी नामक दो पुत्रियां भी हुई, जिनको ऋषभदेव ने सर्वप्रथम युग के आरम्भ में क्रमश: लिपिविद्या (अक्षरविद्या) और अंकविद्या का ज्ञान दिया। बाहुबली और सुंदरी की माता का नाम सुनंदा था। भरत चक्रवर्ती, ब्रह्मी और अन्य 98 पुत्रों की माता का नाम यशावती था

undekhilive
Author: undekhilive

Leave a Comment