पर्चा लीक ….परीक्षा रद्द ….पुलिस की जाँच ….छोड़ेंगे नहीं …कड़ाई से निपटेंगे

सम्यक न्यूज़, पटना.

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC)  द्वारा ली जानेवाली परीक्षाओं में आवेदक उम्र सीमा समाप्त होने तक धैर्य बनाकर रखें. हिम्मत की पतवार कस कर पकड़े रखें ताकि BPSC के भंवर में उनकी नौकरी नैय्या डूबे नहीं. साथ ही कलेजा मजबूत रखें. यह उनके स्वास्थ्य हित में होगा. निराशा, बेचैनी, उतावलापन, भविष्य की चिंता के प्रेत को आस-पास फटकने भी नहीं दें. दरअसल कल रविवार को आयोजित 67वीं प्रारंभिक परीक्षा का पर्चा लीक हो गया. इस खबर के फैलते ही आयोग को सांप सूंघ गया. आला अधिकारी टीवी से चिपक गए. दनादन मोबाइल खंगालने लगे. आनन – फानन में तीन सदस्यीय जाँच कमेटी बनाकर 24 घंटे में रिपोर्ट देने को कहा गया. इसके बाद आयोग साँस ले पाता, इसके पहले ही अद्भुत प्रतिभासम्पन्न एक बिहारी ने प्रश्नपत्र को मोबाइल पर अपलोड कर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को ई-मेल भेज दिया. बीच का लफड़ा ही खत्म. मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी आया. उन्होंने भी कहा कि मामले की कड़ाई से जाँच होगी और किसी को छोड़ेंगे नहीं. अब आयोग की बेचैनी इस कदर बढ़ी कि 24 घंटे की समय-सीमा का ख्याल किये बिना मात्र तीन घंटे में ही परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर दी. आयोग यहीं नहीं रुका, तुरंत एक चिट्ठी तैयार कर सीधे बिहार के पुलिस महानिदेशक कार्यालय को शाम को ही रिसीव करवा दी. आग्रह यह था कि इस पूरे मामले की कड़ाई से जाँच की जाए. आयोग की जान में जान आई. उसने बॉल को डीजीपी के कोर्ट में पहुंचाकर बाबा रामदेव की भांति गहरी साँस ली. अब डीजीपी कार्यालय इस चिट्ठी को अपने पास क्यों रखता. उसने भी चिट्ठी को ईओयू के ADGP को तुरंत फॉरवर्ड कर दिया.  इसके बाद बारी आई राजनेताओं की बयानबाजी और सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट की ताबड़तोड़ कमेंट्स और न्यूज़ शेयरिंग की. बिहार विधान सभा में नेता, प्रतिपक्ष और C.M की कुर्सी पर बैठने को लालायित, दौड़ में सबसे आगे, ऊर्जावान तेजस्वी प्रसाद यादव ने तो सीधे-सीधे बिहार लोक सेवा आयोग को बिहार पर्चा लीक आयोग बता दिया. उन्होंने इस आयोग की साख पर भी सवाल उठाये. कई इलेक्ट्रॉनिक चैनलों पर छोटे-बड़े नेताओं की बयानबाजी धड़ल्ले से चलने लगी. चर्चित नेता पुष्पमप्रिया चौधरी ने ट्विटर पर ताबड़तोड़ कमेंट्स कर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने विद्यार्थियों के भविष्य को मुद्दा बनाकर अगली बार सेंटर गृह जिला में ही रखने की मांग कर डाली. एक एक्टिविस्ट ने तो प्रति आवेदक कम से कम तीन हज़ार रुपये की भरपाई करने की मांग कर डाली. उडती खबर कन्फर्म होते ही आवेदकों ने भी जगह-जगह हंगामा भी किया.

67वीं परीक्षा रविवार को एक ही सीटिंग में दोपहर 12 से  2 बजे तक राज्य के 1000 से ज्यादा केन्द्रों पर ली गयी थी. इस प्रतिष्ठित परीक्षा में बिहार से बाहर रह कर तैयारी करनेवाले हजारों छात्रों समेत छह लाख से अधिक आवेदक शामिल हुए थे. करीब 11 बजे सोशल मीडिया पर पर्चा लीक होने की खबर आने लगी. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की आँखें चमक उठीं. बस, फिर क्या था. मीडिया पर्सन, कैमरामैन अपने माइक के साथ बाइक या चारपहिया पर पल भर में रफूचक्कर हो लिए. जिला मुख्यालय हो या राज्य मुख्यालय- ब्रेकिंग न्यूज़ की बाढ़ आ गयी. टीवी पर इस खबर ने वो रफ़्तार पकड़ी कि KTM बाइक चलानेवाला भी फुटपाथ पर चढ़ गया. मोबाइल पर अपलोड प्रश्नपत्र बिजली की गति से वायरल हो गया था. दावा किया गया कि लीक प्रश्नपत्र “सी” सेट बिलकुल ओरिजिनल है. आरा के वीर कुंवर सिंह कॉलेज स्थित परीक्षा केंद्र का बहादुरी भरा कारनामा अपने नाम को सार्थक कर गया. जैसा नाम वैसा काम. इस केंद्र ने भी अपने नाम के अनुरूप BPSC के छक्के छुड़ा दिए. इस केंद्र को छोड़कर बाकी सभी केन्द्रों पर परीक्षार्थी सरकारी सेवा में चयन की पहली बाधा पर करने की जद्दोजहद में भिड़े हुए थे. जब परीक्षा देकर बाहर निकले तो खबर सुनते ही उनकी आँखों के सामने अँधेरा छा गया. जल्दी-जल्दी सामान समेटकर ट्रेन, बस में किसी तरह लदे-फदे अपने घरों को लौटने लगे. आशा का दामन छूट चुका था. दिमाग में सारी तैयारियों का घटनाचक्र बिजली की गति से घूम रहा था. अब तीन महीने तो गए. फिर वही रेल-पेल होगी, भागम-भाग होगी. इसके बाद भी क्या गारंटी कि फिर यही दुर्घटना नहीं होगी. खैर, यह कहना  बहुत आसान है कि : हारिये न हिम्मत, बिसारिये न हरि नाम.     

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Author: undekhilive

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