जैन मुनि प्रमाण सागर जी महाराज ने आज प्रवचन करते हुए मनुष्य की दृष्टिकोण के बारे में भक्तों को बताया मुनि महाराज ने कहा कि कोई भी काम करें तो भाव से करें सिर्फ काम को काम समझ कर ना करें. मुनि महाराज ने उदाहरण दिया की एक जगह मंदिर बन रहा था तो पहले कारीगर से पूछा कि क्या कर रहे हो उसने उत्तर दिया देख नहीं रहे हो मैं पत्थर लगा रहा हूं. जब दूसरे कारीगर से पूछा आप क्या कर रहे हो उसने कहा मैं अपना पेट पाल रहा हूं. कुछ दूरी पर तीसरा मजदूर तन्मय होकर काम कर रहा था जब उससे पूछा गया क्या कर रहे हो उसने भाव विभोर होकर कहा मैं मंदिर निर्माण का कार्य कर रहा हूं. गुरु महाराज ने कहा कि काम एक ही है लेकिन तीनों का दृष्टिकोण अलग अलग है इसलिए कार्य को अहोभाग्य समझकर करें तो उसका पुण्य आपको प्राप्त होगा.
मुनि महाराज ने कहा कि जीवन में चार दृष्टि है, भौतिक सोच, व्यापारिक सोच, व्यवहारिक सोच एवं आध्यात्मिक सोच.
मुनि महाराज ने कहा की भौतिक सोच है कि खाओ पियो और मौज करो कर्जा लोग घी पियो.
मुनि महाराज ने कहा व्यापारिक सोच बहुत ही कैलकुलेटिव होती है केवल अपने लाभ के लिए कार्य करते हैं.
तीसरा व्यवहारिक सोच इसमें लोगे अपनी इमेज बनाने का यथासंभव प्रयास करते हैं मुनि महाराज ने कहा की अच्छा करने वाला अच्छा रहे यह जरूरी नहीं है अतः अपने को अच्छा बनाइए।
मुनि महाराज ने कहा कि धर्म को धर्म को आत्मा में बसाने का प्रयास कीजिए. अपने धर्म को मंदिर पूजा स्थान तक सीमित न रखें बल्कि धर्म को आत्मा में बसाने का प्रयास करें।
जैन समाज के एम पी जैन ने बताया कि आज प्रातः मीठापुर जैन मंदिर में महामहिम सिक्किम श्री गंगा प्रसाद ने आकर जैन मुनि 108 आचार्य प्रमाण सागर जी से आशीर्वाद लिया।

महामहिम सिक्किम श्री गंगा प्रसाद ने गुरारा मंदिर पंच कल्याणक की पत्रिका का विमोचन किया।
आज मीठापुर जैन मंदिर के जीर्णोद्धार हेतु भूमि पुजन की गई तथा शिला लगाया गया । शिला शांतिलाल जैन, बिजय जैन अध्यक्ष मीठापुर जैन समाज एवं अन्य ने लगाया।

संध्या मुनि महाराज द्वारा शंका समाधान का कार्यक्रम होगा।
आज के कार्यक्रम में धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष अखिलेश जैन, पद्मश्री बिमल जैन, मीठापुर जैन समाज के अध्यक्ष बिजय कासलीवाल जैन, बिनोद पहाड़िया जैन, शांतिलाल जैन सहित सैकड़ों की संख्या में गणमान्य उपस्थित थे।





