पटना। परम पूज्य मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में सकारात्मक सोच हो, तो आदमी कांटों के बीच भी मुस्कुराना सीख लेता है। प्रतिकूलता पार्ट ऑफ लाइफ है जबकि मुस्कुराना आर्ट ऑफ लाइफ। मनुष्य रोते हुए जन्म लेता है, शिकायत करते हुए जीता है और निराशा के मलबे में दबकर मर जाता है। आप कैसा जीना चाहते हो यह आप पर निर्भर करता है। सोच को सकारात्मक बनाइए, कैसी भी घटना घटे, कैसी भी परिस्थिति निर्मित हो, आप उसे सकारात्मक दृष्टि से देखिए, आपका मन कभी खिन्न नहीं होगा।
महाराजश्री ने कहा कि आप छोटी-छोटी बात में नकारात्मक बन जाते हैं। अगर मनुष्य की सोच नकारात्मक होती है तो उसका मन अधीर हो जाता है और उसके अंदर का आत्मविश्वास लड़खड़ाने लगता है। कुछ भी घंटे सकारात्मक दृष्टि से देखिए।
अपनी दृष्टि को यदि हमने रोजमर्रा की जिंदगी में सकारात्मक बना लिया तो सारी समस्याएं वही खत्म हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि सुख तो किसी के निमित्त से हमारे पास आ सकता है लेकिन दुख तो हमारा खुद का खोया हुआ होता है। दृष्टि यदि सकारात्मक हो तो जीवन बदल जाता है।
मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज शनिवार सुबह कांग्रेस मैदान के निकट जैन मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। आज सुबह अभिषेक, शांतिधारा और पूजा की गई। महाराज जी के सान्निध्य में परम पूज्य मुनि विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण किया गया। शांतिलाल जैन, अखिलेश जैन (बिहार धार्मिक न्याय बोर्ड के अध्यक्ष), विजय जैन, अजीत जैन, मुकेश जैन, एमपी जैन, डॉ. गीता जैन ने दीप प्रज्वलित किया।

महाराजश्री के दर्शन के लिए कोलकाता से सुरेंद्र जैन,सिद्धांत जैन, रिया, सरोनी तथा छाबड़ा परिवार पहुंचा। महाराजश्री का पादप्रक्षालन भी किया गया। पंडित सुदर्शन जैन, ब्रह्मचारी संजय जी, ब्रह्मचारी अभय जी तथा मध्य प्रदेश से पधारे पुजारी राजेश जैन ने धार्मिक अनुष्ठान तथा शंका समाधान कार्यक्रम में सहयोग किया।
कल रविवार सुबह भगवान पार्श्वनाथ जी का 108 कलशों से महामस्तिकाभिषेक किया जाएगा। कल ही गुरारा प्राचीन जैन मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद पंचकल्याणक हेतु पात्रों का चयन किया जाएगा।
10 साल बाद जागा पटना का सौभाग्य, मुनिश्री प्रमाण सागर जी का मंगल प्रवेश





